उत्तर प्रदेश और बिहार. ये दो ऐसे राज्य हैं, जो देश का राजनीतिक भविष्य तय करते हैं. ऐसे में प्रादेशिक सत्ता में अपनी पकड़ बनाने के लिए नेता एड़ी से चोटी तक का ज़ोर लगा देते हैं. फिर इसके लिए साम-दाम-दंड-भेद की नीति ही क्यों न अपनानी पड़े. यही वजह है कि उत्तर प्रदेश और बिहार में अक्सर नेता, बाहुबलियोंं से मदद लेने में भी नहीं हिचकते. हालांकि, कई बार नेताओं का बाहुबलियों से ये गठजोड़ देशभर में सुर्खियों बटोरता है.

Nitish Kumar
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बिहार के वर्तमान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ था, जब राज्य की सियासत में 'छोटे सरकार' के नाम से मशहूर एक बाहुबली नेता ने उन्हें चांदी के सिक्कों से तुलवा दिया था. ये बाहुबली नेता कोई और नहीं, बल्कि वर्तमान आरजेडी विधायक अनंत सिंह (Anant Singh) थे.

Anant Singh
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लोकसभा चुनाव लड़ रहे थे नीतीश कुमार (Nitish Kumar)

ये क़िस्सा साल 2004 का है. नीतीश कुमार बिहार की बाढ़ सीट से लोकसभा चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे. इसी दौरान लोक जनशक्ति पार्टी ने मोकामा के निर्दलीय विधायक सूरजभान सिंह को बलिया से टिकट दे दिया. नीतीश को एहसास हो गया था कि सूरजभान सिंह के लोजपा में जाने के बाद उन्हें चुनाव जीतने में दिक्कत आ सकती है. ऐसे में अनंत सिंंह का साथ ज़रूरी है. और मोकामा इस बाहुबली अनंत सिंंह का गढ़ था. 

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लिहाजा, नीतीश कुमार के क़रीबी राजीव रंजन उर्फ़ ललन सिंह ने अनंत सिंह को मिलाया. इसके बाद दोनों क़रीब आए. फिर अनंत सिंह ने जेडूयू की सदस्यता ले ली और नीतीश के साथ उनकी दोस्ती की शुरुआत हुई.

रैली के दौरान नीतीश कुमार को चांदी के सिक्कों से तुलवाया

नीतीश कुमार का साथ अब अनंत सिंह दे रहे थे. इस दौरान बाढ़ संसदीय क्षेत्र में एक रैली हुई, जिसमें नीतीश कुमार जनता को संबोधित कर रहे थे. मगर उस वक़्त अनंत सिंह ने जो किया, उसकी उम्मीद न तो जनता को थी और शायद नीतीश को भी नहीं.

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नीतीश (Nitish Kumar) जनता को अपने सुशासन के वादे समझा रहे थे, मगर उसकी खनक और चमक अनंत सिंह ने बिखेर दी. रैली के दौरान बाहुबली अनंंत सिंह ने नीतीश को चांदी के सिक्कों से तुलवा दिया. विपक्षियों ने नीतीश को इस मुद्दे पर काफ़ी घेरा भी. हालांकि, अनंत सिंह का साथ भी नीतीश को चुनाव में जिता नहीं सका. ख़ैर, इस चुनाव में नीतीश नालंदा सीट से भी खड़े हुए थे और वहां से जीत गए थे.

दोस्ती से दुश्मनी का सफ़र

चुनाव हारने के बाद भी नीतीश और अनंत सिंह की दोस्ती बनी रही. मगर नीतीश को इस दोस्ती में कम और अनंत सिंह को ज़बरदस्त फ़ायदा हुआ. अनंत सिंह की संपत्ति में तेज़ी से बढ़ोरती हुई. हालांकि, बाढ़ में ही एक युवक की हत्या के मामले में अनंत गिरफ्तार हुए और फिर उनके कारनामे एक-एक कर लोगों के बीच आने लगे. उन पर रेप और पत्रकार की पिटाई के आरोप भी लगे. 

इसी के साथ पार्टी में भी उनका कद घटता रहा. साल 2015 में जेडूयू ने उन्हें टिकट नहीं दिया, तो वो बागी हो गए. बाद में मोकामा से ही निर्दलीय विधायक बने. फिर उन्होंंने आरजेडी ज्वाइन कर ली. आपको बता दें, फ़िलहाल ये बाहुबली विधायक जेल में बंद है.