मोदी सरकार ने आम आदमी की निजता को लेकर बड़ा फ़ैसला लिया है. कैबिनेट की बैठक में गुरुवार को केन्द्र सरकार ने 'पर्सनल डाटा संरक्षण विधेयक 2019' को मंज़ूरी दे दी है.

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इसका मतलब ये हुआ अब से अगर कोई कंपनी, साइट या फिर एप ग्राहक का पर्सनल डाटा चुराती है या बेचती तो इसे क्राइम मना जायेगा. साथ ही उस पर भारी जुर्माना भी लगेगा.

बीते बुधवार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई.

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सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने इस संबंध में जानकारी देते हुए कहा कि, इस विधेयक में कानून को तोड़ने वाली कंपनी पर 15 करोड़ या उसके ग्लोबल टर्नओवर के 4 परसेंट तक का जुर्माना लगाये जाने का प्रावधान है. इस दौरान हर कंपनी को ग्राहकों का संवेदनशील डेटा भारत में ही किसी सर्वर पर स्टोर करना होगा.

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इस दौरान जावड़ेकर ने बताया कि ये विधेयक संसद के वर्तमान शीतकालीन सत्र में ही पेश किया जायेगा. विधेयक में ग्राहकों का निजी डेटा हासिल करने और स्टोर करने के बारे में व्यापक दिशा-निर्देश होने के साथ ही व्यक्तियों की सहमति, दंड, मुआवजा, आचार संहिता और उसे लागू करने के मॉडल का भी उल्लेख होगा.

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वाट्सएप मामले पर केंद्रीय मंत्री रवि शंकर प्रसाद पहले ही कह चुके हैं कि सरकार निजता को गंभीरता से लेती है और सूचना की गोपनीयता इसी का हिस्सा है.

पिछले कुछ सालों में वाट्सएप पर डाटा की सुरक्षा में लगी सेंध के बाद सरकार और भी सतर्क हो गई है. 'आधार' की जानकारी लीक होने को लेकर भी पहले काफ़ी बवाल मच चुका है.