बीते बुधवार ISRO प्रमुख के. सिवन ने दूसरे चंद्र अभियान के लिए 'चंद्रयान-2' भेजने की घोषणा की. इस रिपोर्ट में उन्होंने बताया कि 15 जुलाई सुबह लगभग 2.51 AM पर चंद्रयान उड़ान भरेगा. इसके बाद अनुमानन वो 6 या 7 सितंबर को चांद की सतह पर लैंड होगा.

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ISRO का ये मिशन देश के लिये काफ़ी महत्वपूर्ण है, जिसकी कमान दो महिला वैज्ञानिकों के हाथ में दी गई है. रिपोर्ट के अनुसार, एक तरफ़ जहां 'चंद्रयान-2' की मिशन हेड रितू करिधल हैं, वहीं दूसरी ओर प्रोजेक्ट डायरेक्टर की कमान एम. वनीता संभाल रही हैं. यही नहीं, बताया जा रहा है कि इस पूरे अभियान में करीब 30 प्रतिशत महिला वैज्ञानिक शामिल हैं.

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वहीं अगर 'चंद्रयान-2' की मिशन डायरेक्टर रितू करिधल की बात की जाए, तो उन्हें 'रॉकेट वुमन ऑफ़ इंडिया' भी कहा जाता है. एरोस्पेस इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाली रितू, इससे पहले मार्स ऑर्बिटर मिशन में डिप्टी ऑपरेशंस डायरेक्टर की भूमिका निभा चुकी हैं. यही नहीं, 2007 में रितू को राष्ट्रपति अब्दुल कलाम ने ISRO यंग साइंटिस्ट अवार्ड से भी सम्मानित किया था. रितू ने अपनी ग्रेजुएशन लखनऊ विश्वविद्यालय से की है और पोस्ट ग्रेजुशन के बाद उन्होंने ISRO में नौकरी के अप्लाई किया, जिसके बाद वो दुनिया में अपनी कामयाबी का परचम लहरा रही हैं.

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दूसरी ओर एम. वनीता प्रोजेक्ट डायरेक्टर की कमान हैंडल करने वाली पहली महिला हैं. एम वनीता के पास डिज़ाइन इंजीनियरिंग का अच्छा एक्सपीरियंस है. साथ ही वो लंबे वक़्त से सेटेलाइट्स पर काम भी कर रही हैं. रिपोर्ट के अनुसार, 2006 में उन्हें एस्ट्रोनॉमिकल सोसायटी ऑफ़ इंडिया ने बेस्ट वुमन साइंटिस्ट के पुरस्कार से नवाज़ा था.

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कहा जा रहा है कि 'चंद्रयान-2' का उद्देश्य चांद पर पानी और खनिज का पता लगाना है. गर्व है हमें अपने देश की इन प्रतिभावान महिलाओं पर.