पर्यावरण को प्लास्टिक से कितना ख़तरा है, ये हम सब जानते हैं. प्लास्टिक एक ऐसी चीज़ है, जो कभी ख़त्म नहीं होती. फिर भी हम प्लास्टिक का बहुत ज़्यादा इस्तेमाल करते हैं.

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हमारे देश में रोज़ाना सैंकड़ों टन प्लास्टिक जमा होता है और उससे निजात पाना बेहद मुश्किल है. प्लास्टिक चुनने वाले हर रोज़ दिखाई देते हैं. देश के हर शहर में प्लास्टिक का ढेर दिखना आम सी बात है. प्लास्टिक और कचरा चुनकर हमारे आस-पड़ोस को साफ़ रखने वाले भी हमें दिखते हैं.

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अजीब बात है कि जो हमारे आस-पास की जगह को साफ़-सुथरा रखते हैं उन्हें ही भरपेट खाना नहीं मिल पाता.


एक रिपोर्ट के मुताबिक छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर की म्युनिसपैलिटी ने ऐसे लोगों को भरपेट खाना मुहैया कराने की अनोखी तरक़ीब निकाली है. अंबिकापुर को इंदौर के बाद दूसरा सबसे साफ़-सुथरा शहर चुना गया था.

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म्युनिसपैलिटी में 1 किलो प्लास्टिक जमा कराने वाले को भरपेट भोजन कराया जाएगा और 500 ग्राम प्लास्टिक जमा कराने को नाश्ता. इस प्लास्टिक से म्युनिसिपाल्टी सड़क बनाने की सोच रही है.


शहर के मुख्य बस अड्डे में ये प्लास्टिक लेकर खाना देने वाला कैफ़े खोला जाएगा.

शहर के मेयर अजय तिरके ने सोमवार को म्युनिसपैलिटी बजट पेश किया और ये योजना भी बताई. इस बजट में गारबेज स्कीम कैफ़े के लिए 5 लाख दिए जाएंगे.

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अंबिकापुर में प्लास्टिक से बनी सड़क पहले ही बनाई जा चुकी है.


देश के बाक़ी शहरों, ख़ासकर के बड़े शहरों को भी ऐसी स्कीम्स निकालनी चाहिए.