देश में कोरोना वायरस के मामले बढ़ रहे हैं. वायरस ज़्यादा न फैले इसलिए 21 दिन के लॉकडाउन का ऐलान हुआ. जिनके पास संसाधन थे, वे घर पर बैठकर रामायण देख रहे हैं या लोगों को फ़िटनेस टिप देने और बांटने का ज्ञान दे रहे हैं. लेकिन इन सबके बीच वो प्रवासी मज़दूर जो अपने घर-गांव से महज़ दो वक़्त की रोटी के लिए दूसरे शहरों में आए थे, दोतरफ़ा उत्पीड़न का शिकार हो रहे हैं. जी हां, उत्पीड़न का.

एक तरफ़ इन मज़दूरों की कमाई का कोई ज़रिया नहीं रहा. खाने-रहने के लाले पड़ गए. दूसरी तरफ़ जब उन्होंने अपने घर लौटना चाहा तो हमारे अति सक्रिय प्रशासकों का निपटाऊ प्रोजेक्ट बन गए.

दरअसल, देश के अलग-अलग इलाकों में काम करने वाले प्रवासी मज़दूर पैदल ही सैकड़ों मील का सफ़र तय कर अपने घर लौट रहे हैं. नोएडा से भी कुछ मज़दूर अपने घर की ओर निकल पड़े. और जब बरेली पहुंचे तो उनके साथ वहां के प्रशासन ने ऐसा अमानवीय व्यवहार किया, जिसे देखकर ये समझ पाना मुश्क़िल हो रहा है कि ख़तरनाक कोरोना है या हमारी सुरक्षा में मुस्तैद सरकारी अधिकारी.

Source: reuters

एक वीडियो सोशल मीडिया पर सर्कुलेट हो रहा है. वीडियो बरेली का है. यहां दूसरे जिलों से आए कुछ वर्कर्स पर ऐंटी लार्वा केमिकल छिड़कने की बात सामने आई है. इन मज़दूरों में कई ऐसे लोग भी थे, जो कि परिवार के साथ घरों को लौट रहे थे और सभी को प्रशासन के इस व्यवहार का सामना करना पड़ा. शहर की सीमा पर ही सभी को सड़क पर बैठाकर इनपर केमिकल छिड़ककर सैनिटाइज किया गया.

वीडियो में एक शख़्स ये कहता सुनाई पड़ रहा है- ‘अपनी आंखे बंद कर लो. बच्चों की आंखे बंद कर लो.’ मज़दूरों ने तो आंखें बंद कर लीं, मगर इस वीडियो को जिसने भी देखा उसकी आंखें खुली की खुली रह गईं.

NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक़, एक अधिकारी ने बताया कि, ‘प्रवासियों पर क्लोरीन और पानी के मिश्रण का छिड़काव किया गया था. कोई रासायनिक पदार्थ नहीं इस्तेमाल किया गया था. हमने उनसे आंखें बंद करने को भी कहा था.’

उसने आगे कहा, ‘हमारा अमानवीय होना उद्देश्य नहीं था... सभी को सैनिटाइज़ करना जरूरी था और वहां बड़ी संख्या में लोग वापस लौट कर आए थे. हमने वही किया जो हमें सबसे सही लगा.’

हालांकि, सोशल मीडिया पर इस व्यवहार की जमकर आलोचना हो रही है. जिसके बाद बरेली के डीएम ने भी ट्वीट कर घटना के ज़िम्मेदारों पर कार्रवाई करने की बात कही है.

‘इस वीडियो की पड़ताल की गई, प्रभावित लोगों का सीएमओ के निर्देशन में उपचार किया जा रहा है. बरेली नगर निगम एवं फायर ब्रिगेड की टीम को बसों को सैनेटाइज़ करने के निर्देश थे, पर अति सक्रियता के चलते उन्होंने ऐसा कर दिया. सम्बंधित के विरुद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं.’

बता दें, हज़ारों की संख्या में प्रवासी मज़दूर पैदल ही अपने घरों को लौट रहे हैं. इनमें से ज़्यादातर उत्तर प्रदेश और बिहार से हैं. ऐसे में यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को चिट्ठी लिखकर उम्मीद जताई है कि यूपी के लोगों के लिए राज्य में हर संभव इंतज़ाम किये जाएंगे. हालांकि, अपने ही राज्य के मज़दूरों के साथ इस तरह के व्यवहार पर उनकी कोई प्रतिक्रिया अबतक नहीं आई है.