इस साल पूरी दुनिया में कड़ाके की ठंड पड़ी. इतनी ज़्यादा ठंड कि पिछले कई साल के रिकॉर्ड टूट गए. वहीं आर्कटिक में हुए ब्लास्ट की वजह से उत्तरी अमेरिका और यूरोप के कई देशों में काफ़ी बर्फ़बारी देखने को मिली. आर्कटिक से आ रही तेज़ बर्फ़ीली हवाओं की वजह से अमेरिका के कई राज्य ठंड के कहर से जूझ रहे हैं. रिपोर्ट के अनुसार, कई जगहों पर तापमान -40 डिग्री सेल्सियस तक नोट किया गया. यही नहीं, अगर हालात ऐसे ही रहे, तो अगले दो दिनों में शिकागो अंटार्कटिका से भी ठंडा हो सकता है.

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वैज्ञानिकों के अनुसार, इससे पहले अमेरिका में कभी भी ऐसी ठंड नहीं पड़ी. ठंड की वजह से लोगों का 5 मिनट के लिये भी घर से बाहर कदम रखना मुसीबत बन सकता है. शिकागो में सड़क से लेकर नदी तक सब बर्फ़ से जमी हुई हैं. यही नहीं, रेल सेवा चालू रखने के लिये रेल की पटरियों पर आग जला कर बर्फ़ पिघलाई गई. अमेरिका में हो रही बर्फ़बारी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी ट्वीट किया है. डोनाल्ड ट्रंप का ट्वीट देख कर ऐसा लगा जैसे मानों उन्हें ग्लोबल वार्मिंग से कोई फ़र्क ही नहीं पड़ता है. गंभीर समस्या पर उनका ये ट्वीट देख कर काफ़ी निराशा हुई.

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ट्रंप ने ट्वीट करते हुए लिखा, आने वाले दिनों में और भी ठंड बढ़ेगी. लोग इस समय एक मिनट के लिये भी घर के बाहर नहीं रह सकते. ग्लोबल वॉर्मिंग कहां हो तुम, जल्दी आओ. हमें तुम्हारी ज़रूरत है.
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आर्कटिक से आ रही तेज़ बर्फ़ीली हवाओं का असर अमेरिका और यूरोप के साथ-साथ उत्तर भारत में भी हो रहा है. यही वजह है कि इस बार उन पहाड़ी इलाकों में भी भारी बर्फ़बारी हुई है, जहां 10 साल से बर्फबारी नहीं हुई थी.

यहीं नहीं, इस बार ठंड के कहर से अमेरिकी की सबसे बड़ी झीलों में से एक 'लेक मिशिगन' भी नहीं बच पाई और लेक का पानी बर्फ़ बन गया. 'लेक मिशिगन' दुनिया की पांचवी सबसे बड़ी लेक है, लेकिन जमी हुई झील का दृश्य वाकई चिंताजनक है. तस्वीरों में आप इस ख़ूबसूरत लेक का बेहाल नज़ारा देख सकते हैं.

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ठंड की वजह क्या है?

क्या आप जानते हैं कि इस बर्फ़बारी और ठंड की वजह ग्लोबल वॉर्मिंग है, क्योंकि ग्लोबल वार्मिंग से सिर्फ़ गर्मी ही नहीं, बल्कि ठंड भी होती है और इसके ज़िम्मेदार भी हम ही हैं.

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