जम्मू-कश्मीर के हंदवाड़ा में शनिवार रात को आतंकवादियों और सुरक्षाबलों की मुठभेड़ हुई थी. इस एनकाउंटर में सुरक्षाबलों ने दो आतंकवादियों को ढेर कर बंधक बनाए गए सभी नागरिकों को बचा लिया था. मगर इस ऑपरेशन में हमारे 5 जवान शहीद हो गए. इनमें से एक कर्नल आशुतोष शर्मा भी थे.

Col. Ashutosh Sharma
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कर्नल आशुतोष शर्मा इस होली पर घर आए थे. ये एक सरप्राइज़ विज़िट थी. मगर उनके घरवालों को क्या पता था कि ये उनकी आख़िरी विज़िट होगी. कर्नल आशुतोष शर्मा यूपी के बुलंदशहर के रहने वाले थे. उन्हें नम आंखों से याद करते हुए उनके भाई पीयूष शर्मा ने कहा- 'वो होलिका दहन के दिन शाम 7:30 बजे घर पर आए थे. हमने अगले दिन उनके आने की ख़ुशी में जमकर पार्टी की थी.'

Col. Ashutosh Sharma
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उनके परिवार से आशुतोष जी की आख़िरी बात 1 मई को हुई थी. तब उन्होंने बताया था कि कोरोना वायरस महामारी के चलते उनकी यूनिट 21 राष्ट्रीय राइफ़ल्स का Raising Day नहीं मनाएगी. पीयूष ने ये भी बताया कि उनकी एक 12 साल की बेटी भी है. उन्होंने ये भी बताया कि वो शुरू से ही इंडियन आर्मी जॉइन करना चाहते थे

उन्होंने कहा- 'वो एक बहादुर सैनिक थे. वो हमेशा भारतीय सेना के बारे में बातें किया करते थे. वो अपनी रेजिमेंट की शौर्य गाथाएं सुनाते और उसकी परंपराओं के बारे में विस्तार से बताते थे. उसे अपनी रेजिमेंट पर नाज़ था.'

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शहीद कर्नल आशुतोष शर्मा 21 राष्ट्रीय राइफ़ल्स के कमांडिंग ऑफ़िसर थे. हंदवाड़ा एनकाउंटर को उन्होंने लीड किया था. उनकी पत्नी पल्लवी शर्मा ने उन्हें याद करते हुए कहा- 'वर्दी से उन्हें प्रेम था. उन पर मुझे गर्व है. वो कहते थे आंतकियों को मार कर घर आऊंगा. उन्होंने जो कहा था वो किया. वो आ रहे हैं लेकिन तिरंगे में लिपट कर. '

कर्नल आशुतोष पिछले दो दशक से इंडियन आर्मी की सेवा कर रहे थे. उन्हें 2 बार सेना मेडल से सम्मानित किया जा चुका था.
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