भले ही पिछले कई दशकों से देशभर में गंदगी सबसे बड़ी समस्या रही हो, लेकिन चंडीगढ़ भारत का एक ऐसा शहर है, जो सफ़ाई के मामले में काफ़ी चुस्त-दुरुस्त है. इसकी सबसे बड़ी वजह है, यहां के कड़े नियम क़ानून. यहां लोग कचरा फैलाने से पहले 10 बार सोचते हैं.

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देशभर में समय-समय पर सफ़ाई को लेकर कई तरह के अभियान चलाये गए, लेकिन हुआ कुछ नहीं. अन्य शहरों की बात करें, तो लोग खा-पीकर कुछ भी, कहीं भी फेंक देते हैं. लेकिन चंडीगढ़ शहर प्रशासन ने कचरा फैलाने वालों के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई करनी शुरू कर दी है.

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सितंबर 2018 में चंडीगढ़ शहर प्रशासन ने 'चंडीगढ़ सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट बाय-लॉ' के तहत कचरा फैलाने वालों पर भारी जुर्माने का सुझाव दिया था. इसके तहत जिस भी घर के बाहर कचरा फैला मिलेगा उसके मालिक से 5 हज़ार, जबकि कंपनी के बाहर कचरा फैला होने पर कंपनी के मालिक से 10 हज़ार रुपये वसूले जायेंगे. इससे पहले कचरा फैलाने वालों से 500 रुपये ही वसूले जाते थे.

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'टाइम्स ऑफ़ इंडिया' के मुताबिक़, 1 अप्रैल से चीफ़ सेनेटरी इंस्पेक्टर के नेतृत्व में 9 टीमों के साथ Anti-Littering अभियान की शुरुआत की गई.

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इस अभियान के पहले ही दिन औद्योगिक क्षेत्रों में कचरा फैलाने वाले 40 लोगों के चालान काटे गए. प्रशासन ने इन सभी पर कड़ी कार्रवाई करते हुए प्रत्येक पर 10 हज़ार रुपये का जुर्माना लगाया. इसके अलावा प्लास्टिक का इस्तेमाल करने वाले 40 लोगों के चालान भी काटे गए जिन पर 5-5 हज़ार का जुर्माना लगाया गया.

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इस अभियान के दूसरे दिन भी कचरा फैलाने वाले लगभग 40 लोगों पर जुर्माना लगाया गया. वहीं प्लास्टिक का इस्तेमाल करने वाले 7 लोगों के भी चालान काटे गए. चंडीगढ़ शहर प्रशासन मात्र 2 दिन में ही कचरा फैलाने वालों से 10 लाख रुपए का जुर्माना वसूल चुका है.

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दो दिन में 10 लाख रुपए का जुर्माना वसूलने का मतलब है कि लोग सुधरना ही नहीं चाहते.