हिंदुस्तान पुलिस अपने बर्ताव की वजह से लोगों के दिलों में एक अच्छी इमेज बनाने में अभी तक पूरी तरह से कामयाब नहीं हो पाई है. ज़्यादातर पुलिसवालों ने जनता के सामने वर्दी का एक ग़लत उदाहरण पेश किया है. हांलाकि, बदलते समय के साथ कुछ पुलिसवालों ने वर्दी और इंसानियत का एक अच्छा उदाहरण जनता के सामने रखा है. जिससे अब लोगों के मन में पुलिस की छवि बदलने लगी है. इन्हीं चंद अच्छे पुलिसवालों में आंध्र प्रदेश के कांस्टेबल के कृष्ण मूर्ति भी हैं.

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कृष्ण मूर्ति पार्वतीपुरम नगर पुलिस स्टेशन में तैनात हैं. आपको जानकर हैरानी होगी कि वो हर महीने अपने वेतन से 10 हज़ार रुपये निकाल कर ग़रीबों की मदद करते हैं. कृष्णा मूर्ति श्रीकाकुलम ज़िले के वीरगट्म मंडल के कोट्टुगुमड़ा गांव के निवासी हैं और उन्हें ग़रीबों की सहायता के लिये जाना जाता है. वो कहते हैं कि मेरी सैलरी 45 हज़ार रुपये है और उससे हर महीने में 10 हज़ार रुपये ज़रूरतमंदों की मदद में लगाता हूं.

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कृष्ण मूर्ति हर महीने 30 ऐसे लोगों को चुनते हैं, जिन्हें राशन और कपड़ों की सख़्त आवश्यकता होती है. सर्दी में बुज़ुर्गों को कंबल देकर उन्हें ठंड से बचाते हैं. जब उनसे पूछा गया कि उन्हें ये सब करने की प्रेरणा कहां से मिली, तो वो कहते हैं कि उन्होंने बचपन में अपने पिता और दादी को ग़रीबों की सहायता करते देखा है. पिता और दादी की ये नेक भावना उनके दिल को छू गई और इसीलिये आज वो उनके इस कार्य को आगे बढ़ा रहे हैं.

Poor People
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आज तक हम पुलिस को ज़बरन लोगों से पैसे वसूलते हुए देखते थे और कृष्ण मूर्ति ने उसके विपरीत कार्य करके इंसानियत की मिसाल पेश की है. सच्ची उन्हें दिल से सलाम.