पाकिस्तान में इस वक़्त Ariel डिटर्जेंट पाउडर का विरोध हो रहा है.

विरोध की वजह है एक Ad.

पहले ये जान लीजिये कि Ad/ विज्ञापन किस बारे में है:

इस विज्ञापन में महिलाएं ऐसी गंदी चादरें धोती दिख रही हैं, जिन पर समाज द्वारा लगाई गईं बंदिशें लिखी हुई थी.

महिलाएं डॉक्टर, पत्रकार, खिलाड़ी, आदि की भूमिका में हैं और समाज के उन सवालों के धो रही हैं, जो उनके रास्ते को रोकते हैं. विज्ञापन के आखिर में पाकिस्तान महिला क्रिकेट टीम की कप्तान बिस्माह-मारूफ़ फ़्रेम में आती हैं और कहती हैं, 'ये सिर्फ़ जुम्ले नहीं दाग़ हैं लेकिन ये दाग़ हमे क्या रोकेंगे.'

ऐसे आपको इस वीडियो में कोई बुराई नहीं दिखेगी लेकिन इस विज्ञापन ने पाकिस्तान के रूढ़ीवादी लोगों को बुखार दे दिया है. जहां कई लोग इसे प्रगतिशील बता रहे हैं, वहीं कई इस विज्ञापन को इस्लामी शिक्षा के ख़िलाफ़ बता रहे हैं.

सर्फ़ एक्सेल की तरह ही इस वक़्त ट्विटर पर #BoycottAriel #ArielHiDaaghHey ट्रेंड कर रहा है. कई लोग विज्ञापन बनाने वाले के ऊपर इस्लाम विरोधी होने के कारण कार्यवाई करने की मांग कर रहे हैं. पाकिस्तान के विज्ञापन नियामक के ऊपर भी इस विज्ञापन को पास करने के कारण सवाल उठाए गए.

पाकिस्तान में ऐसा विवाद पहली बार नहीं हुआ, इससे पहले साल 2016 में क्यूमोबाइल को भी इसी तरह के विरोध का सामना करना पड़ा था. उसके विज्ञापन एक महिला क्रिकेटर अपने पिताकी मर्ज़ी के बिना अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने के लिए घर छोड़ कर चली जाती है. राइड शेयरिंग एप 'करीम' ने अपने विज्ञापन में दुल्हन को शादी छोड़ कर भागते दिखाया था, लोगों ने इसके ऊपर भी जम कर बवाल काटा था.