दिल्ली में COVID-19 पॉज़िटिव एक नर्स की मृत्यु हो गई है, राष्ट्रीय राजधानी में नर्सों की मौत का आंकड़ा दो तक पहुंच गया है. मृतक की पहचान रघुबीर नगर निवासी राजम्मा मधुसूदनन के रूप में हुई है. राजम्मा जो मूल रूप से केरल के कोट्टायम की रहने वाली हैं और दशकों से दिल्ली में काम कर रही थीं. वो राजौरी गार्डन के शिवाजी अस्पताल में काम कर रही थीं. 

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रिपोर्ट्स के मुताबिक़, कोरोना पॉज़िटिव पाए जाने के दो दिन बाद बुधवार को उनकी मौत हो गई. इस बीच राजधानी के कीर्ति नगर इलाक़े में कालरा अस्पताल की आठ और नर्स कोरोना पॉज़िटिव पाई गई हैं. 

पिछले हफ़्ते कालरा अस्पताल की एक नर्स अंबिका पीके ने संक्रमित होने के बाद सफदरजंग अस्पताल में दम तोड़ दिया था. 

अस्पताल के मालिक डॉ. आर.एन. कालरा ने बताया कि, ‘हमारे हॉस्पिटल की आठ नर्स कोरोना पॉज़िटिव पाई गई हैं. इनमें से तीन को हमारे हॉस्पिटल में ही आइसोलेशन में रखा गया है. अन्य को सांस लेने में परेशानी थी, ऐसे में दिशानिर्देशों के अनुसार, उन्हें होम क्वारंटीन किया गया है.' 

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उन्होंने कहा, ‘हमारे पास द्वारका में भी 50 बेड के साथ एक यूनिट है. हमने COVID रोगियों के लिए वहां 34 बेड आरक्षित किए हैं.’ 

अंबिका की मौत के बाद उनके सहयोगियों ने आरोप लगाया था कि उनके लिए पीपीई किट की कमी थी और नर्सों को उन्हें फिर से इस्तेमाल करने के लिए कहा गया था, जबकि डॉक्टरों को नई किट्स दी गईं थीं. 

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अप्रैल में एलान किया था कि कोरोना संक्रमितों के इलाज करने के दौरान अगर किसी की मौत होती है, तो सरकार उन सभी के परिजनों को 1 करोड़ रुपये का मुआवज़ा देगी. 

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सीएम केजरीवाल ने कहा था, ‘अगर कोई भी डॉक्टर, नर्स, अस्पतालों में सफ़ाई कर्मचारी, लैब टेक्नीशियन मरीज़ों को अटैंड करते हुए संक्रमित होता है और इस वजह से उसकी मौत होती है तो दिल्ली सरकार उनके परिवार को 1 करोड़ रुपये का मुआवज़ा देगी.’ 

स्वास्थ पेशेवर इस वक़्त कितने जोख़िम में काम कर रहे हैं, ये दो नर्सों की मौत के बाद एक बार साबित हुआ है. रिपोर्ट्स के मुताबिक़, COVID-19 की वजह से भारत में क़रीब 31 डॉक्टरों और पांच नर्सों की मौत हो चुकी है. ज़्यादातर मामलों में वे या तो इलाज कर रहे थे या अनजाने में कोराना मरीज़ों के संपर्क में आ गए थे. 

शुरुआती दिनों के दौरान निजी और सरकारी क्षेत्र के अस्पतालों को अपने कर्मचारियों के लिए पीपीई की कमी को लेकर काफ़ी संघर्ष करना पड़ा था, कुछ लोगों का मानना है कि इस स्थिति में अब सुधार हो गया है. हालांकि, अब भी कई स्वास्थ्य कर्मचारियों का आरोप है कि उन्हें अभी भी उचित प्रोटेक्टिव गियर नहीं मिला है, जिससे उनके संक्रमित होने का ख़तरा बना हुआ है.