विश्व स्वास्थ्य संगठन की प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. सौम्या स्वामीनाथन के अनुसार विश्व भर के 200 करोड़ लोगों तक वैक्सीन पहुंचाने के लिए लगभग $18.1 बिलियन की लागत आएगी.  

डॉ. स्वामीनाथन के अनुसार इस समय विश्व में वैक्सीन के 200 उम्मीदवार हैं जो कि विकास के अलग-अलग पड़ाव पर हैं. 15 वैक्सीन का मानव क्लिनिकल ट्रायल चल रहा है.  

इन सबको देखते हुए उन्हें एक उम्मीद है की आने वाले 12 से 18 महीने में वैक्सीन बन जाएगी.   

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शुक्रवार को एक वर्चुअल मीडिया कांफ़्रेंस को संबोधित करते हुए उन्हें बताया कि COVAX सुविधा के माध्यम से 950 मिलियन ख़ुराक की ख़रीद के लिए उच्च-आय और उच्च-मध्यम-आय वाले देशों से प्रतिबद्धताओं की आवश्यकता थी. साथ ही यह भी सुनिश्चित करने की आवश्यकता थी की इन टीकों का वितरण देशों में तेज़ी से हो सके. 

स्वामीनाथन ने कहा कि AstraZeneca के पास सबसे बड़ी वैश्विक प्रतिबद्धता है और वह समय के मामले में अग्रणी उम्मीदवार है. 

'वो फेज़ 2 ट्रायल्स से आगे बढ़ फेज़ 3 ट्रायल की योजना बना रहे हैं. Moderna भी मध्य जुलाई तक फेज़ 3 के क्लिनिकल ट्रायल्स शुरू कर देगा. हालांकि, जब तक हम क्लिनिकल ट्रायल्स से मिले नतीजे नहीं देख लेते तब तक इन उम्मीदवारों के प्रभाव और सुरक्षा पर कुछ नहीं कहा जा सकता. इसलिए हमें ज़रूरत है कि हम अलग-अलग वैक्सीन के क्लिनिकल विकास के लिए निवेश करें जिससे की सफलता की सम्भावना अधिक हो जाए.'   

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ऑक्सफ़ोर्ड विश्वविद्यालय और AstraZeneca की प्रयोगात्मक वैक्सीन क्लिनिकल ट्रायल के आख़िरी चरण में पहुंचने वाली पहली उम्मीदवार है. 

इस वैक्सीन का इस्तेमाल साउथ अफ़्रीका और ब्राज़ील में हो रहा है. भारत के सीरम इंस्टीट्यूट ने $ 100 मिलियन का निवेश करके भारत और अन्य निम्न और मध्यम आय वाले देशों के लिए एक अरब खुराक का उत्पादन किया.