अमेरिकी सरकार की ओर से वित्तपोषित अध्ययन में दावा किया गया है कि नोवल कोरोना वायरस सतह और हवा में कई घंटो तक जीवित रह सकता है.

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news18 की रिपोर्ट के मुताबिक़, वैज्ञानिकों ने पाया कि COVID-19 बीमारी का कारण बनने वाले वायरस के शरीर के बाहर ज़िंदा रहने की क्षमता SARS के बराबर ही है.

इसका मतलब ये है कि अगर किसी में इस वायरस के लक्षण नहीं भी हैं, फिर भी बड़ी संख्या में ये बीमारी लोगों में फ़ैल सकती है. यही वजह है कि ये महामारी 2002-2003 में SARS से भी ज़्यादा ख़तरनाक है.

Centers for Disease Control and Prevention (CDC), University of California, Los Angeles और Princeton के वैज्ञानिकों द्वारा तैयार इस पेपर को मंगलवार को न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन (NEJM) में प्रकाशित किया गया था.

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नया वायरस दो से तीन दिनों तक प्लास्टिक और स्टेनलेस स्टील की सतहों पर जीवित रह सकता है. वहीं, कागज की सामग्री पर अधिकतम 24 घंटे तक जीवित रहने में सक्षम है.

टीन ने वायरस की क्षमता का पता लगाने के लिए खांसने या छींकने वाले Nebulizer का इस्मेमाल किया तो पाया ये वायरस हवा में तीन घंटे तक जीवित रह सकता है.

ये अध्ययन सबसे पहले मेडिकल प्री-प्रिंट वेबसाइट पर पिछले हफ़्ते पोस्ट की गई थी. उसका पूरी तरह से निरीक्षण होने से पहले ही इसे डाल दिया गया था. इसने बहुत से लोगों का ध्यान आकर्षित किया. कुछ वैज्ञानिकों ने इसकी आलोचना भी की है. उनका कहना है कि इसमें हवाई ख़तरे बढ़ने की बात बढ़ाचढ़ा की गई है.

वायरस मुख्य रूप से श्वसन बूंदों द्वारा प्रेषित होता है और इस रूप में ये केवल कुछ सेकंड के लिए किसी व्यक्ति के खांसी या छींकने के बाद जीवित रहता है.

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आलोचकों ने ये सवाल उठाया कि क्या नेबुलाइज़र ने इंसान के खांसने और छींकने की नकल कर पाया है?

NEJM पर स्टडी करने वाली टीन ने SARS वायरस पर भी सेम टेस्ट किया तो पाया कि दोनों ही वायरस एक जैसा व्यवहार करते हैं.

हालांकि, वो ये बताने में असफ़ल रहे कि कोरोना वायरस ने अब तक जहां 2 लाख लोगों को संक्रमित किया और 8 हज़ार लोगों की मौत हो गईं. वहीं SARS केवल 8 हज़ार को संक्रमित कर सका जबकि 800 लोग ही मरे. आख़िर इसके पीछे क्या वजह है?

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इस पर शोधकर्ता का कहना है कि ‘ये बताता है कि इन वायरस की महामारी संबंधी विशेषताओं में अंतर संभवत: अन्य कारकों से उत्पन्न होता है, जिसमें Upper Respiratory Tract में High Viral Loads और SARS-CoV-2 से संक्रमित व्यक्तियों के लिए वायरस को बहाना और वायरस को प्रेषित करना संभावित है.’