भारत में कोरोना महामारी का कहर बढ़ता ही जा रहा है. कोरोना संक्रमितों का आंकड़ा 51 लाख के पार पहुंच चुका है, जबकि मरने वालों की संख्या 83 हज़ार के पार पहुंच चुकी है.

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हाल ही में कोरोना को लेकर केंद्र सरकार के एक ग़ैर ज़िम्मेदाराना बयान के बाद स्वास्थ्य विभाग ने नाराज़गी दिखाई थी. इस दौरान केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने कहा था कि, केंद्र सरकार के पास कोरोना महामारी से मरने वाले स्वास्थ्य कर्मियों के आंकड़े नहीं हैं.

इस पर अब इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए सरकार को एक पत्र भेजा है. पत्र में आईएमए ने सरकार पर कोविड-19 महामारी के कारण डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मचारियों के बलिदान के प्रति उदासीन रहने का आरोप लगाया है.

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आईएमए ने बुधवार को एक प्रेस नोट जारी कर कहा कि, दुनिया के किसी भी देश ने इतने डॉक्टर्स और स्वास्थ्य कर्मचारी नहीं खोए हैं, जितने भारत ने खोए हैं. यदि सरकार कोरोना से संक्रमित और इस दौरान अपनी जान गंवाने वाले डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों के आंकड़े नहीं रख सकती है तो फिर 'महामारी अधिनियम 1897' और 'आपदा प्रबंधन अधिनियम' का कोई मतलब नहीं रह जाता है.

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इस दौरान आईएमए ने कोविड-19 महामारी में मरने वाले डॉक्टरों की एक सूची प्रकाशित की है. इसके तहत अब तक कोविड-19 महामारी के कारण 382 डॉक्टरों की मौत हो चुकी है. इसके साथ ही सरकार से अपील भी की है कि मृत डॉक्टरों के परिवारों को सहायता प्रदान करे. क्योंकि उनके परिवार और बच्चे सरकार से हरजाना और सांत्वना के हक़दार हैं.

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आईएमए ने आरोप लगाते हुए कहा कि, सरकार एक तरफ़ तो डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों को कोरोना वॉरियर्स कह रही है. वहीं दूसरी ओर मृतक डॉक्टरों व स्वास्थ्य कर्मियों के परिवारों को बिना किसी सरकारी मदद की यूं ही छोड़ दिया जा रहा है. आईएमए ने सरकार से नर्सों और अन्य स्वास्थ्य कर्मचारियों के प्रतिनिधियों से भी डेटा लेने की अपील की है.