14 फ़रवरी को सीआरपीएफ़ के काफ़िले पर हुए आतंकी हमले ने देश को ऐसा जख़्म दिया है, जो शायद ही कभी भरे. अब इस हृदय विदारक घटना से जुड़ी कुछ कहानियां भी सामने आने लगी हैं, जिनके बारे में जानकर किसी का दिल पसीज जाएगा. ऐसी ही एक कहानी है शहीद प्रदीप सिंह यादव की, जो हमले के दौरान अपनी पत्नी से बात कर रहे थे.

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पुलवामा अटैक में शहीद हुए 42 जवानों में प्रदीप यादव सिंह भी थे. आतंकवादियों ने जब उनकी बस को निशाना बनाया तब वो अपनी पत्नी नीरजा सिंह से फ़ोन पर बात कर रहे थे. उनकी पत्नी ने टाइम्स ऑफ़ इंडिया को बताया कि, जब वो फ़ोन पर बात कर रहीं थीं, तब अचानक तेज़ धमाका सुनाई दिया और फ़ोन कट गया. इसके बाद उनकी दुनिया ही बदल गई.

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प्रदीप सिंह यूपी के कन्नोज ज़िले के अजन सुखसेनपुर गांव के रहने वाले थे. उनकी पत्नी ने कहा, मैं अपने पति से फ़ोन पर बात कर रही थी, तभी दूसरी तरफ़ से एक तेज़ धमाके की आवाज़ सुनाई दी. कुछ ही सेकेंड में फ़ोन कट गया. मुझे कोई अनहोनी होने का एहसास हुआ. मैंने कई बार उन्हें कॉल कर उनका हाल जानने की कोशिश की, पर फ़ोन नहीं लगा. मेरा सब कुछ ख़त्म हो चुका था.
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'इस घटना के कुछ देर बाद मुझे सीआरपीएफ़ कंट्रोल रूम से फ़ोन आया और उन्होंने मेरे पति के शहीद होने की ख़बर दी'.

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शहीद प्रदीप सिंह अपने पीछे दो बच्चियों, सुप्रिया(10) और सोना(2) को छोड़ गए हैं. इस दुर्घटना से पहले उन्होंने उसके कुशल-मंगल होने की ख़बर ली थी. नीरजा को जब इस बात की ख़बर लगी, तब वो अपने मायके में थी. वो अपने ससुराल अजन सुखसेनपुर पहुंच गईं हैं, जहां उनके पति का शव आज पहुंचने की संभावना है.