जिस किताब के पन्ने पर न्याय लिखा था, उसे दीमक कब का खा गए. अब तो बस इंसाफ़ की कतरने बची हैं, जो महज़ शब्द के दफ़्न होने का इंतज़ार कर रही हैं. हर रोज़ जाति के ख़ंजर से मानवता का गला रेता जाता है. लहू सड़क पर चीखता है ख़ुद को समेटे जाने को, लेकिन शायद हमारी नज़रों में वो इस क़ाबिल भी नहीं कि उसे धोने को हम अपने हाथ लगा सकें.

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समाज में भले ही रोज़ दलितों के साथ भेदभाव हो, लेकिन हम निश्चिंत हैं कि संविधान ने समानता दे दी है. शायद यही वजह है कि आज भी एक दलित इस बात का इंतज़ार कर रहा है कि संविधान में मिला बराबरी का दर्जा, उसे भी इंसाफ़ दिलाएगा.

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दरअसल, हम बात कर रहे हैं Sampath Saidulu की, जिसके घर को कथित तौर महज़ इसिलए तोड़ दिया गया क्योंकि उसका घर ऊंची जातियों के एरिया में एकलौता दलित मक़ान था. 

‘मैं हैदराबाद में कूड़ा बीनने का काम करता हूं. इस घर को बनाने के लिए मैंने 20 साल काम किया. मेरा घर तबाह कर दिया गया क्योंकि ये इलाके का एकमात्र दलित-स्वामित्व वाला घर था. जब मैंने कानूनी तौर पर वापस लड़ने की कोशिश की, तो मुझे दलित होने के नाते अपमानित करने के लिए मानव मल को मेरे घर के बाहर छोड़ दिया गया.’

                    - Sampath Saidulu

उन्होंने एक ट्वीट में वहां के स्थानीय विधायक के फ़ॉलोवर्स पर उनके घर को तोड़ने का आरोप लगाया है. 

Sampath अब अपना घर बनवाना चाहते हैं, इसलिए उन्होंने लोगों से मदद की अपील की है. उन्होंने कहा, ‘हमने इसके ख़िलाफ़ केस किया और अब न्याय का इंतज़ार कर रहे हैं. हमें अब मदद की ज़रूरत है क्योंकि हमें अपने घर के बचे हुए हिस्से के पुनर्निर्माण के लिए कम से कम 5 लाख की आवश्यकता होगी. कृपया आगे आएं और हमारी मदद करें, आपका कोई भी योगदान हमारी बहुत मदद करेगा.’

इसी के साथ Sampath ने अपनी ट्विटर और यूट्यूब प्रोफ़ाइल भी शेयर की है, जहां आप उनके स्ट्रगल के बारे में जान सकते हैं.