‘पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुआ, पंडित भया न कोय,

ढाई आखर प्रेम का, पढ़े सो पंडित होय’

कबीर ये कहते-कहते मर गया, लेकिन जाहिलों को पंडित न बना सका. उसके ढाई आखर, जाति के दो आखर के आगे कमज़ोर साबित होते गए. अपनी आत्मा पर ऊंच-नीच की चमड़ी बांधे इन जातिवादी जिस्मों को न तो प्यार दिखाई पड़ता है और न ही महसूस होता है. अंजाम ये है कि देश में आज भी इश्क़ जाति की जकड़ में दम तोड़ देता है.

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ताज़ा उदाहरण महाराष्ट्र के पुणे का है. यहां एक दलित युवक की रॉड से पीट-पीटकर हत्या कर दी गई. उसका कसूर था कि वो कथित तौर पर एक ऊंची जाति की लड़की से प्यार करता था.

ये घटना पुणे जिले के उपनगर पिंपल सौदागर इलाके में 7 जून को हुई. 20 वर्षीय विराज जगतप अपनी बाइक से जा रहा था, तब ही लड़की के परिवार वालों ने उसकी गाड़ी पर टेम्पो से टक्कर मार दी. इसके बाद उस पर रॉड और पत्थरों से हमला किया गया.

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रिपोर्ट के मुताबिक़, लड़की के पिता जगदीश काते ने इस दौरान युवक पर थूका और जातिसूचक गालियां भी दीं. वो लोग उससे बार-बार यही सवाल कर रहे थे कि उसकी लड़की को प्रपोज़ करने की हिम्मत कैसे हुई.

विराज को काफ़ी चोटें आईं थीं. जिसके बाद उसे हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया. लेकिन अफ़सोस उसे बचाया न जा सका. सोमवार को अस्पताल में ही उसकी मौत हो गई.

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विराज के चाचा जितेश की एफ़आईआर पर पुलिस ने इस मामले में 4 लोगों को गिरफ्तार किया है, साथ ही दो नाबालिगों को हिरासत में लिया है.

The Indian Express को दिए एक इंटरव्यू में पुलिस आयुक्त संदीप बिश्नोई ने बताया, ‘आरोपियों पर हत्या के साथ एससी/एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है. आरोपियों का कहना है कि विराज लड़की को घूरता और परेशान करता था, पहले भी उसे चेतावनी दी गई थी. इस वजह से दुश्मनी चल रही थी. हम लड़की का भी पक्ष जानने के लिए उससे बात करेंगे.’