देश के लिंगानुपात पर नज़र डालें तो महिलाओं, बच्चियों और लड़कियों की संख्या पुरुषों, बच्चों, लड़कों के मुकाबले बहुत कम है. किसी-किसी क्षेत्र में ये इतनी कम है कि लोगों को अपने लिए पत्नियां तक खरीदनी पड़ रही है. इन सब के बाद भी देश में ऐसे कई पिता हैं जो आज भी देवी के मंदिर में जाकर ही घर में बेटी पैदा न पर कन्या भोज करवाने की मन्नत मांगते हैं.

जब कि न जाने कितनी बार ही पिता के सम्मान की रक्षा के लिए बेटियों ने अपना बलिदान दिया है. देश में एक और बेटी ने अपनी पिता की ज़िन्दगी बचाने के लिए अपनी ही जान ले ली.

महाराष्ट्र की 18 वर्षीय, सारिक सुरेश झुटे अपने पिता को आत्महत्या करने से रोकना चाहती थी, इसलिये उसने खुद अपनी जान ले ली. सारिका के पिता के सिर पर बहुत सारा कर्ज़ था. उनकी सारी फसल भी खेत में ही जल गई थी, जिस कारण वे कर्ज़ लौटाने में असक्षम थे. इस साल बरसात भी नहीं हुई, जिससे उनके परिवार की हालत बद से बद्तर हो गई.

सारिका से घर और पिता की हालत छिपी नहीं थी. कर्ज़ से परेशान होकर सारिका के चाचा ने कुछ दिनों पहले ही आत्महत्या कर ली थी, जिससे सारिका के मन में ये डर घर कर गया था कि कहीं उसके पिता भी आत्महत्या न कर लें.

अपने सुसाइड नोट में सारिका ने लिखा,

‘पापा में आपकी हालत के बारे में जानती हूं. बारिश न होने से फसल बर्बाद हो गई और इस कारण चाचा ने आत्महत्या कर ली. हमारा परिवार भी कर्ज़ में डूबा हुआ है. आपने कर्ज़ लेकर फसल बोई थी, जो जल गई. मुझसे आपकी हालत देखी नहीं जा रही.
पिछले साल आपने दीदी की शादी की, उनकी शादी का कर्ज़ भी आप अभी तक नहीं चुका पाए हैं. आपके ऊपर मेरी शादी की भी ज़िम्मेदारी है. मैं नहीं चाहती की आप चाचा की तरह ही आत्महत्या कर लें. इसलिये मैं अपनी ज़िन्दगी ख़त्म कर रही हूं.
आपकी सारिका’

इस नोट को पढ़कर सारिका के पिता की हालत का अंदाज़ा लगाया जा सकता है. आज भी देश में कई पिता हैं जो बेटी को बोझ समझते हैं. हम सारिका के आत्महत्या करने को सही नहीं मानते, पर अपने पिता के लिए इतना बड़ा बलिदान बहुत कम बच्चे ही देते हैं.