बेशुमार लाइटिंग, शानदार डेकोरेशन और ढोल-बाजे वाली बारात, दिल्ली की शादियां में कोई कमी नहीं होती पर इन्हीं चकाचौंध शादियों में जो खाना-पीना बर्बाद होता है, उसकी भी कोई कमी नहीं.


जस्टिस मदन बी. लोकुर को दी गयी एक रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में लगभग 300 बारात घर हैं और वेडिंग सीज़न में हर दिन 30,000 से 50,000 शादियां होती हैं. ऐसे में आप अंदाज़ा लगा सकते हैं कि खाने-पीने की कितनी बरबादी होती होगी जबकि रोज़ाना कितने लोग भूखे पेट ही सो जाते हैं.

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सुप्रीम कोर्ट की तरफ़ से इस पर चिंता जताने के बाद, अब दिल्ली सरकार ने 'सोशल फ़ंक्शंस' के लिए एक पॉलिसी तैयार की है. पॉलिसी को सुप्रीम कोर्ट की मॉनिटरिंग कमिटी मंज़ूरी दे चुकी है और उम्मीद है कि इस महीने में ही ये लागू हो जाएगी.

इस पॉलिसी की कुछ ख़ास बातें:

1) इस ड्राफ़्ट पॉलिसी की सबसे ज़रूरी चीज़ है महमानों की संख्या पर नियंत्रण रखना, जो वेन्यू के साइज़ और पार्किंग की जगह के अनुसार तय किया जाएगा.

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2) बचा हुआ खाना ग़रीबों तक पहुंचे, इसके लिए ऑर्गनाइज़र या केटरर को किसी NGO से टाई-अप करना होगा, जो इस प्रक्रिया की ज़िम्मेदारी लेगा. बाद में ऑर्गनाइज़र को इसके प्रूफ़ भी जमा करने होंगे.

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3) सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने खाने की गुणवत्ता पर भी ज़ोर दिया. अब इस पॉलिसी के अनुसार, फ़ूड सेफ़्टी डिपार्टमेंट के अधिकारी इन फ़ंक्शनों में मौजूद रह कर इस पर नज़र रखेंगे. केटरर को अपना FSSAI लाइसेंस भी वेन्यू पर डिस्प्ले करना होगा.

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4) ट्रैफ़िक में कोई रुकावट न आये, इसके लिए उतनी ही गाड़ियों को पार्क होने की अनुमति मिलेगी, जितनी वेन्यू में जगह होगी. सड़क किनारे पार्किंग पर रोक लगायी जाएगी.

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5) वेन्यू के बाहर किसी भी प्रकार का बैंड-बाजा या बग्घी-घोड़ा मना होगा. फ़ंक्शन हॉल के परिसर के बाहर अब इसकी इजाज़त नहीं मिलेगी.

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6) बंदूक़ या कोई भी फ़ायरआर्म भी वेन्यू में ले जाना मना होगा. अक्सर देखा गया है कि जश्न मनाते हुए गोली बारी की वजह से कोई न कोई दुर्घटना हुई है.

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पॉलिसी का उल्लंघन करने का मतलब भारी-भरकम फ़ाईन, जो ऑपरेटर्स को देना होगा, होस्ट को नहीं. पहली बार के लिए 5 लाख रुपये, दूसरी बार 10 लाख और तीसरी बार में 15 लाख के साथ-साथ 30 दिन का बफ़र पीरियड देने के बाद लाइसेंस रद्द हो जाएगा.

इस पॉलिसी की सफ़लता के लिए कई विभागों को साथ आना होगा. दिल्ली पुलिस, एक्साइज़ डिपार्टमेंट, फ़ूड सेफ़्टी विभाग और सभी नगरपालिकाओं को.