जनवरी 2017 के यूनिवर्सिटी महिला प्रोफ़ेसर रेप केस का फ़ैसला आ गया है. दिल्ली हाईकोर्ट ने रेप के आरोपी को बरी कर दिया है. आपको बता दें, मामला 2 साल पहले का है जब एक यूनिवर्सिटी प्रोफ़ेसर ने एक शख़्स पर रेप का आरोप लगाया था. उस कथित रेप की घटना की रिपोर्ट महिला ने एक महीने बाद की थी और कथित रेप की घटना के दिन से लेकर केस दर्ज कराने के दिन तक महिला ने 45 दिनों में आरोपी को 529 बार फ़ोन किया.

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महिला ने इस घटना के बारे में बताते हुए कहा था,

इस शख़्स से सोशल मीडिया पर उसकी दोस्ती हुई थी. फिर महिला और उस शख़्स को नोएडा स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट से दिसंबर 2016 में सेमिनार में शामिल होने का निमंत्रण मिला. सेमिनार वाले दिन महिला ने आरोप लगाया कि आरोपी ने दवाइयां खिलाकर होटल में उसके साथ रेप किया. वहीं आरोपी ने कहा कि जिस दिन रेप की बात हो रही है, उस दिन वो आधिकारिक छुट्टी पर था, सेमिनार में नहीं गया था.
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महिला के रिपोर्ट दर्ज कराने के बाद, इस केस पर जस्टिस मनमोहन और जस्टिस संगीता ढींगरा सहगल की पीठ ने सुनवाई शुरू की. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने महिला से कई सवाल पूछे, जैसे रेप के तुरंत बाद FIR क्यों नहीं दर्ज कराई गई? पीड़िता ने मेडिकल टेस्ट से इनकार क्यों किया? कोर्ट ने ये भी पूछा कि FIR दर्ज कराने से पहले महिला ने आरोपी को 529 बार फ़ोन क्यों किया?

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साथ ही कोर्ट ने कहा कि जब महिला के साथ ज़बरदस्ती की जा रही थी, तो महिला को इसका विरोध करना चाहिए था, शोर मचाना चाहिए था. महिला उसी समय पुलिस को भी कॉल कर सकती थी. होटल के स्टाफ़ से मदद मांग सकती थी. कोर्ट ने इस पर भी सवाल उठाए कि कथित रेप का आरोपी महिला को मेट्रो स्टेशन तक छोड़ने गया. कोर्ट ने कहा कि महिला के आरोपों में कई लूपहोल हैं. इसलिए आरोपी को बरी कर दिया गया है.

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ग़ौरतलब है कि इस मामले में आरोपी को निचली अदालत पहले ही बरी कर चुकी थी. निचली अदालत के ही फ़ैसले को महिला ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी. हाईकोर्ट ने आरोपी को बरी कर दिया. हालांकि उसे इस कथित रेप के मामले में दो साल जेल में बिताने पड़े.

कोर्ट का फ़ैसला भले ही आ गया है, लेकिन इस तरह की घटनाएं समाज के लिए अनुचित हैं और यही सबसे बड़ी वजह, जो एक इंसान का दूसरे इंसान पर विश्वास धीरे-धीरे ख़त्म कर रही है.