कोरोना संकट के बीच डॉक्टर, नर्स और स्वास्थ्य कर्मचारी दिन रात एक करके मरीज़ों की सेवा कर रहे हैं. बदले में सरकार की तरफ़ से प्रोत्साहन मिलने के बजाय उन्हें वेतन तक नहीं दिया जा रहा है. दिल्ली के कस्तूरबा हॉस्पिटल की नर्सों को पिछले 3 महीने से वेतन नहीं मिल पाया है.  

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नगर निगम के कस्तूरबा अस्पताल में नर्सों ने 3 महीने से वेतन नहीं मिलने पर सोमवार को 2 घंटे का विरोध प्रदर्शन किया था. इस दौरान उनका कहना था कि, हमें आख़िरी बार वेतन मार्च में दिया गया था. तब से ही हम बिना सैलरी के काम कर रहे हैं. सैलरी नहीं मिल रही है तो हम अपनी ज़िंदगी ख़तरे में क्यों डालें? 

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इस मामले में हॉस्पिटल में नर्स संघ के अध्यक्ष बी. एल. शर्मा ने कहना था कि, उन्हें आख़िरी बार सैलरी मार्च में मिली थी, जिसका भुगतान मई में किया गया था. प्रशासन से आश्वासन मिलने तक हमारा विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा.  

देश की राजधानी में ये हालात तब हैं जब दिल्ली हाईकोर्ट ने ऐसे मामलों में हस्तक्षेप कर नगर निकायों को जल्द से जल्द अपने कर्मचारियों को वेतन देने के निर्देश दिए हैं. बावजूद इसके सभी नगर निगम अपने कर्मचारियों को केवल आश्वासन ही देते दिखाई दे रहे हैं.  

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जनसत्ता से बातचीत में कस्तूरबा हॉस्पिटल की एक का कहना था कि 'हमें 3 महीने से वेतन नहीं मिला है. उधार लेकर वित्तीय खर्च पूरे करने पड़ रहे हैं. वेतन न मिलने के चलते मुझे क्रेडिट कार्ड से काम चलाना पड़ा, लेकिन अब मुझे होम लोन और क्रेडिट कार्ड के बिलों के भुगतान को लेकर बैंक से नोटिस मिला है.

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हम पिछले 3 महीनों से बेहद परेशान हैं. हमारे कुछ साथी तो ऐसे भी हैं जिनके पास राशन ख़रीदने के भी पैसे नहीं हैं. कुछ लोग अपने बच्चों की स्कूल फ़ीस नहीं भर पा रहे हैं. अगर वो हमें भुगतान नहीं कर सकते तो अधिकारियों को सुनिश्चित करना चाहिए कि हमें कम से कम भोजन तो मिल जाए.  
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कोरोना के ख़तरे और मरीज़ों की हालत को देखते हुए हमने ये मुद्दा पहले नहीं उठाया. हमारे कई साथी अपनी जान जोखिम में डालकर हर दिन सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल कर हॉस्पिटल आते हैं. अगर हमें आगे भी वेतन नहीं मिला तो हम अपनी ज़िंदगी ख़तरे में क्यों डालें?
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इस मामले में नॉर्थ एमसीडी के मेयर जय प्रकाश ने कहा कि, निगम ने सभी ख़र्चों को रोक दिया गया है, केवल वेतन देने पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है. हम कर्मचारियों को जल्द से जल्द वेतन देने की कोशिश कर रहे हैं.