2 अक्टूबर से देश भर में सिंगल यूज़ प्लास्टिक बंद हो गया. वैसे तो ये नियम 1 सितंबर से ही लागू हो गया था, पर 2 अक्टूबर 'डी-डे' टाइप थी. शायद यही वजह है कि दुर्गा पूजा पंडाल भी इको-फ़्रेंडली तरीके अपनाकर प्रकृति पर प्लास्टिक का भार कम कर रहे हैं.

Indian Express की रिपोर्ट के मुताबिक़, दिल्ली के सबसे पुराने, कश्मीरी गेट पंडाल थर्मोकोल कप्स के बजाए दोने में भोग और प्रसाद बांट रहे हैं. 110 साल पुरानी इस पूजा का पंडाल इस बार रवींद्रनाथ ठाकुर के घर के जैसे सजाया गया है.

मात्री मंदिर, सफ़दरजंग एनक्लेव की मात्री मंदिर सर्बोजनिन दुर्गा पूजा समिति भी इस बार पान के पत्तों के प्लेट्स पर भोग बांटेंगी.

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मयूर विहार फ़ेज़ 1 के मिलनी दुर्गा पूजा एसोसिएशन की दुर्गा प्रतिमा पूरी तरह से मिट्टी और इको-फ़्रेंडली रंगों से बनाई गई है.


आराध्या पार्क, आईपी एक्सटेंशन के इंद्रप्रस्थ मैत्री मंदिर निर्माण सोसाइटी ने कबाड़ का सामान, रिसाइकल्ड चीज़ों से ही पंडाल और मूर्ति बनाई है. मूर्तियों में गैस सिलेंडर, स्टील के टुकड़ों का इस्तेमाल हुआ और सजावट के लिए यूज़ किए हुए सॉफ़्ट ड्रिंक कैन्स.