हाल ही में तमिलनाडु के महाबलीपुरम में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच एक अनौपचारिक मुलाक़ात हुई. इस दौरान वर्ल्ड के दो बड़े नेताओं के आने को लेकर महाबलीपुरम को दुल्हन की तरह सजाया गया था.

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पीएम मोदी और शी जिनपिंग की इस ख़ास मुलाक़ात के दौरान जिस चीज़ को लेकर महाबलीपुरम की सबसे ज़्यादा तारीफ़ हुई वो थी यहां की साफ़-सफ़ाई. इस दौरान पीएम मोदी ने शनिवार की सुबह महाबलीपुरम के तट पर स्वच्छता अभियान चलाकर लोगों को स्वच्छता का संदेश भी दिया.

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दौरान महाबलीपुरम को 'क्लीन एंड क्लेयर' बनाने के पीछे सफ़ाई कर्मचारियों का योगदान अहम रहा, लेकिन इन रियल हीरोज़ को लेकर आई इस ख़बर को पढ़कर आपको दुःख ज़रूर होगा.

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दरअसल, पिछले एक महीने से महाबलीपुरम को 'क्लीन एंड क्लेयर' बनाने वाले सफ़ाई कर्मचारियों को अब तक उनका मेहनताना नहीं दिया गया है. एक महीने तक दिन-रात काम करने के बावजूद हज़ारों अनियमित सफ़ाई कर्मचारियों को खाली हाथ घर लौटना पड़ा है. वेतन कब मिलेगा इसको लेकर भी उनके पास कोई जानकारी नहीं है.

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मोदी-जिनपिंग की इस ख़ास मुलाक़ात के दौरान टेंपल टाउन इलाके में साफ़-सफ़ाई का काम करने वाली जी. सावित्री का कहना है कि 'मनरेगा स्कीम' के तहत उन्हें प्रतिदिन सिर्फ़ 100 रुपये दिए जा रहे थे.

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जी. सावित्री साथ ही कहती हैं कि, मोदी-जिनपिंग की मुलाक़ात को लेकर करीब 20 दिन पहले ग्राम पंचायत ने सफ़ाई कर्मचारियों की ज़रूरत बताकर हमारे गांव के कई लोगों को महाबलीपुरम भेजा था, लेकिन इतने दिनों तक काम करने के बावजूद हमें अब तक हमारा वेतन नहीं मिल पाया है.

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चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के आगमन से कुछ समय पहले तक स्थानीय प्रशासन ने नियमित सफ़ाई कर्मचारियों से भी लगातार कार्य करवाया. इसके लिए उन्हें किसी भी तरह का अतिरिक्त पैसा भी नहीं दिया गया.

एस. रमेश का कहना है कि, पिछले 10 दिनों से वो लगातार 12 से 15 घंटे तक कूड़ा उठाने का काम कर रहे हैं. हर दिन सुबह से लेकर देर रात तक काम करना पड़ता है.