बीते रविवार को देश की राजधानी दिल्ली गैंगवॉर की घटना से दहल उठी थी. द्वारका मोड़ मेट्रो स्टेशन के पास बीच सड़क पर बदमाशों ने ट्रैफ़िक रोककर एक-दूसरे पर गोलियां बरसाई, जिसमें मंजीत महल गैंग के राइट हैंड प्रवीण गहलोत की मौत हो गई.

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दिल्ली के द्वारका मोड़ जैसे भीड़ भाड़ वाले इलाके में गैंगवॉर की इतनी भयानक तस्वीर देख लोग, अब भी दहशत में हैं. दो बदमाश बीच सड़क पर ट्रैफ़िक रुकवाकर सफ़ेद रंग की एक कार पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसा रहे थे. गोलियों की आवाज़ सुनकर जब पुलिस मौके पर पहुंची, तो वहां का नज़ारा भयानक था.

इसके बाद दिल्ली पुलिस के कॉस्टेबल नरेश कुमार ने अकेले मोर्चा संभाला. नरेश ने मेट्रो पिलर के पीछे छिपकर बदमाशों पर 3 गोलियां दागी, जिसमें से एक गोली से गैंग्स्टर विकास दलाल को मार गिराया. इस साहसिक कदम के बाद 56 साल के नरेश रातोंरात हीरो बन गए हैं. नौकरी के आख़री पड़ाव में दिल्ली पुलिस ने उन्हें इस बहादुरी के लिए 'आउट ऑफ़ टर्न प्रमोशन' देने का फ़ैसला किया है.

कौन हैं कॉस्टेबल नरेश कुमार?

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वर्तमान में दिल्ली पुलिस की PCR सेवा में तैनात नरेश कुमार साल 1991 में दिल्ली पुलिस में शामिल हुए थे. नरेश के परिवार के अधिकतर लोग पुलिस में ही कार्यरत हैं. नरेश के बेटे ने भी हाल ही में कॉन्स्टेबल के तौर पर दिल्ली पुलिस जॉइन की है.

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इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में नरेश ने कहा कि 'मैंने इससे पहले कई ख़तरनाक जगहों पर रेड मारी, लेकिन ये घटना सबसे अलग थी. इस दौरान मैंने अकेले मोर्चा संभाला. पुलिस को सूचित करने के लिए मेरे पास बैक-अप भी नहीं था. वक़्त कम था इसलिए मैंने सिर्फ़ 5 मिनट के अंदर 3 गोलियां चलाकर गैंगस्टर विकास दलाल को मार गिराया.

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नरेश ने आगे कहा, जब दोनों तरफ़ से गोलियां चल रही थीं तो इसी बीच री-लोडिंग करते वक़्त मेरी गन गिर गयी थी. एक वक़्त तो लगा बदमाशों की गोली न जाने कब मेरा सीना छलनी कर के निकल जाएगी, लेकिन मेरी किस्मत अच्छी थी. मैंने जल्दी से गन उठाकर उसे फिर से री-लोड किया और आख़िर तक बदमाशों से लड़ता रहा.

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नरेश ने आगे कहा, 'मैं अपनी इस कामयाबी से ख़ुश हूं. मेरी इस उपलब्धि से मेरा पूरा परिवार भी ख़ुश है. पिछले दो पीढ़ियों में मेरे परिवार का कोई भी शख़्स ऐसा नहीं कर पाया. दिल्ली पुलिस में तैनात मेरे बेटे को भी मुझ पर गर्व है.'

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मैं चाहता हूं मेरे इस साहसिक कदम से लोगों के बीच पुलिस की जो इमेज बनी है वो सुधरे, आखिरकार हम उनकी सुरक्षा के लिए ही दिन-रात तैनाती देते हैं.

दरअसल, गैंगस्टर विकास दलाल को सूचना मिली थी कि प्रवीण गहलोत द्वारका आ रहा है. इसके बाद उसने अपने तीन-चार साथियों के साथ 3 किमी तक प्रवीण का पीछा किया. मौका मिलते ही उसने प्रवीण गहलोत को ठिकाने लगा दिया, लेकिन ठीक समय पर पहुंचकर पुलिस ने उनका काम बिगाड़ दिया. विकास दलाल पुलिस की गोली से मारा गया.

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पुलिस के मुताबिक, गैंगवॉर में मारे गए बदमाश की पहचान मंजीत महल गैंग के राइट हैंड प्रवीण गहलोत के रूप में हुई है, जो इस गैंग में फ़ाइनैंस का काम देखता था. वहीं पुलिस की गोली से मरा गया विकास दलाल पिछले साल अक्टूबर में फ़रीदाबाद पुलिस की कस्टडी से भागा था, जो पहले मंजीत महल गैंग से ही जुड़ा था. बाद में इस गेंग से उसकी दुश्मनी हो गई थी.