लोकसभा 2019 में हम सभी ने नारेबाज़ी और सांसदों के साथ हुई 'रैगिंग' को देखा. संविधान की सुरक्षा की कसम खाते हुए ही कई सांसदों ने इसकी अवहेलना की.


सत्र के अगले दिन राष्ट्रपति ने भी संसद में भाषण दिया.   

राष्ट्रपति के भाषण पर 2 दिन तक बहस होनी थी और इसी भाषण पर अपना मत रखने को खड़ी हुई पूर्व विधायक और पहली बार सांसद बनी, महुआ मोइत्रा.  

महुआ ने अपने 10 मिनट के भाषण में कई ऐसी बातें कहीं, जिस पर पहले भी चर्चाएं हुई हैं. इन बातों को पहले भी Point Out किया गया है. ये कुछ ऐसी बातें थीं, जिन पर बात करने में कई लोग अब डरते हैं क्योंकि उन्हें 'एंटी-नेशनल' कह दिया जाता है, या फिर 'पाकिस्तान जाओ' जैसी बातें सुनने को मिलती हैं.  

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महुआ ने पूर्ण बहुमत से जीत कर आई सत्तापक्षीय पार्टी को उनकी विफ़लताएं 10 मिनट में ही गिना दी. जिस पवित्र हॉल में कुछ दिनों पहले नारेबाज़ी कर के शपथ लेते हुए सासंदों की 'रैगिंग' टाइप ली जा रही थी, वहीं खड़े होकर महुआ ने कुछ ऐसी बातें कहीं जिन पर विमर्श होना आज की तारीख़ में सबसे ज़रूरी है.  

देश के कोने-कोने में भीड़ द्वारा हत्या से लेकर NRC जैसे नियमों तक, विरोध में उठती आवाज़ों को दबाने की कोशिश से लेकर राजनीति को धर्म के साथ जोड़े जाने तक, महुआ ने सत्ताधारी पार्टी की तीखी आलोचना की.


पहली बार बोलते हुए महुआ ने अमरीका के 'हॉलोकॉस्ट मेमोरियल म्यूज़ियम' में 2017 में प्रदर्शित एक पोस्टर का उदाहरण दिया, जिसमें शुरुआती फ़ासीवाद के लक्षण बताए गए थे.   

महुआ ने फ़ासीवाद के उन 7 शुरुआती लक्षणों को भारतीय परिवेश से जोड़कर ये बातें कहीं- 

1. देशवासियों को विभाजित करने के लिए अलग तरह का राष्ट्रवाद फैलाया जा रहा है. विदेशियों को नापसंद करना सिखाया जा रहा है. 


एक ऐसा देश जहां मंत्री अपनी डिग्री नहीं दिखा पाते, वहां ग़रीब लोगों को इस देश की राष्ट्रीयता के सुबूत देने को कहा जा रहा है. 

2. मानवाधिकारों का हनन. मॉब लिचिंग करने वालों को माफ़ी मिल रही है. राजस्थान के पहलू खान से लेकर कल झारखंड में अंसारी की हत्या तक, ये लिस्ट लंबी ही होती जा रही है. 

3. मीडिया के हाथ बांधे जा रहे हैं. देश की लगभग हर बड़े मीडिया हाउस पर एक व्यक्ति का कन्ट्रोल है. फ़ेक न्यूज़ के ज़रिए लोगों को भटकाया जा रहा है. 

4. राष्ट्र सुरक्षा के नाम पर नए-नए दुश्मन बनाए जा रहे हैं. 2014 से 2019 के बीच कश्मीर में जवानों की शहीदी में 106% का इज़ाफ़ा हुआ है. 

5. देश में राजनीति और धर्म मिल गए हैं. NRC और Citizenship Amendment Bill द्वारा ये एक ही समुदाय के लोगों को निशाना बनाया जा रहा है. 

6. छठा लक्षण सबसे ख़तरनाक है. बुद्धिजीवियों का अनादार किया जा रहा है. प्रश्न करने वाली आवाज़ों को कुचला जा रहा है. 

7. चुनाव प्रक्रिया की स्वतंत्रता ख़त्म होती जा रही है. चुनाव आयोगा के ज़रिए कई अधिकारियों का तबादला किया गया. इस चुनाव में 60 हज़ार करोड़ ख़र्च किए गए और 50% सिर्फ़ एक पार्टी ने ख़र्च किया. 

महुआ ने अपने भाषण के आख़िर में राहत इंदौरी का ये शेर पढ़ा:

जो आज साहिबे मसनद हैं कल नहीं होंगे 
किराएदार हैं ज़ाती मकान थोड़ी है
सभी का ख़ून है शामिल यहाँ की मिट्टी में
किसी के बाप का हिन्दोस्तान थोड़ी है

                    - राहत इंदौरी

महुआ के भाषण पर ट्विटर सिपाहियों का रिएक्शन-