कुछ समय पहले मीडिया में एक ख़बर सामने आई थी, जिसमें यह दावा किया गया था कि ईटली से हनीमून मना कर लौटी एक महिला कोरोना वायरस से संक्रमित है और वह आईसोलेनशन सेंटर से भाग कर दिल्ली होते हुए अपने घर आगरा जा पहुंची है. दरअसल, उसकी सच्चाई अब जाकर लोगों के सामने आ पाई है.

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अब इस महिला के देवर ने मीडिया में फैलाई जा रही ख़बरों का खंडन करते हुए कहा कि उनके भाई-भाभी हनीमून मनाने इटली नहीं, बल्कि ग्रीस, फ़्रांस और स्विट्ज़रलैंड गए थे. 23 फ़रवरी वो लोग दिल्ली से एथेंस (ग्रीस) के लिए निकले थे, जबकि 6 मार्च को म्यूनिख (जर्मनी) के रास्ते मुंबई वापस लौटे थे.

महिला के देवर ने सभी यात्राओं से जुड़ी टिकिट्स भी शेयर की हैं.

जबकि रिपोर्ट्स में कहा गया था कि ये दंपत्ति इटली से 'कोरोना वायरस' से संक्रमित होकर 27 फ़रवरी को भारत लौटा था. दंपत्ति को दोनों को बेंगलुरु में आईसोलेशन में रखा गया था जहां से भागकर महिला आगरा अपने मायके आ गयी, लेकिन पूरी सच्चाई कुछ और है.

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Boom से बातचीत में महिला के देवर ने कहा कि, भाई और भाभी 6 मार्च को जर्मनी से लौटने के बाद 8 मार्च तक मुंबई में ही थे. वो 8 मार्च को मुंबई से रात 7:55 की फ़्लाइट से रात 9.45 बजे बैंगलुरु एयरपोर्ट पहुंचे थे. इस दौरान दोनों कुछ घंटों के लिए बेंगलुरु एयरपोर्ट पर ही रहे क्योंकि भाभी को रात की 1:40 की फ़्लाइट से दिल्ली जाना था. इस दौरान भाभी बैंगलुरु से 1:40 की फ़्लाइट लेकर दिल्ली लौट गईं जबकि भाई बेंगलुरु स्थति हमारे घर आ गए. भाभी सुबह करीब 4:30 दिल्ली पहुंची. इसके बाद उन्होंने दिल्ली से आगरा के लिए सुबह 10 बजे गतिमान एक्सप्रेस पकड़ी और उसी दिन दोपहर आगरा अपने मायके पहुंच गयीं.

महिला के देवर ने सभी यात्राओं से जुड़ी टिकिट्स भी शेयर की हैं.

मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया था कि इस महिला के पति को 7 मार्च को 'कोरोना वायरस' संक्रमित पाया गया था, लेकिन संक्रमित शख़्स के छोटे भाई का कहना है कि भाई 9 मार्च को बेंगलुरु स्थित अपने गूगल ऑफ़िस गए थे. इस दौरान ऑफ़िस में किये गये इंटरनल स्क्रीनिंग में उनमें किसी भी तरह का संक्रमण नहीं पाया गया.

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इस बीच जब भाई को हल्का-हल्का बुख़ार आने लगा तो 10 मार्च को हम उन्हें 'राजीव गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ़ चेस्ट डिसीज़' हॉस्पिटल में लेकर गए. इस दौरान डॉक्टरों ने भाई की ट्रैवल हिस्ट्री जानने के बाद हमें 'कोरोना वायरस' टेस्ट कराने को कह दिया. टेस्ट कराने के बाद डॉक्टरों ने हमें घर जाने को कह दिया. 11 मार्च को हमें हॉस्पिटल से कॉल आया कि उनके भाई का टेस्ट पॉज़िटिव आया है इसलिए उन्हें जल्द से जल्द आईसोलेशन में रखने के लिए एम्बुलेंस भेज दी गयी है.

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मेरे भाई को 24 घंटे तक आईसोलेशन में रखने के बाद डॉक्टरों ने 12 मार्च को हमें फ़ाइनल रिपोर्ट सौंपकर कहा कि भाई पूरी तरह से 'कोरोना वायरस' से संक्रमित हैं. जबकि मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया था कि मेरे भैया भाभी दोनों को आईसोलेशन में रखा गया था, जहां से भाभी भाग गयी थी जिसमें ज़रा भी सच्चाई नहीं है.

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दरअसल, सचाई ये तो है कि बेंगलुरु में पति के 'कोरोना वायरस' पॉज़िटिव पाए जाने के बाद महिला ने भी आगरा स्थित SNL हॉस्पिटल में अपना 'COVID-19' टेस्ट करवाया था. इस दौरान महिला की ट्रैवल हिस्ट्री जानने के बाद डॉक्टरों ने उसे आईसोलेशन में रख दिया था. लेकिन हॉस्पिटल में पर्याप्त साधन न होने पर जब महिला ने उच्च अधिकारियों से बात कर उन्हें डिस्चार्ज कर घर भेज देने के लिए कहा तो उसे घर भेज दिया गया.

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इस मामले में जब आगरा के चीफ़ मेडिकल ऑफ़िसर मुकेश वत्स से बात की गयी तो उनका कहना था कि 12 मार्च को इस महिला का 'COVID-19' टेस्ट करवाया गया था, जिसकी रिपोर्ट आनी बाकी है. महिला के परिजनों ने हॉस्पिटल की कंडीशन को देखते हुए उसे आईसोलेशन वार्ड में रखने से साफ़ तौर पर मना कर दिया था. जब हम उनके घर गए तो कहा दिया गया कि वो घर पर नहीं हैं, लेकिन वो घर पर ही थीं.

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इस दौरान काफ़ी अनुरोध के बाद उन्हें आईसोलेशन वार्ड में भर्ती कराया गया. इस दौरान महिला के परिवार के सदस्यों का भी टेस्ट कराया गया, लेकिन सभी के 'COVID-19' टेस्ट नेगेटिव निकले. हालांकि, अब भी महिला के फ़ाइनल रिज़ल्ट का इंतज़ार है.