लॉकडाउन के दौरान इंसान भले ही घरों में बंद हुए, लेकिन इंसानियत सड़कों पर आज़ाद रही. ये इंसानियत ही थी, जो कभी भूखे शख़्स की रोटी बनी तो कभी बेघर का बिछौना, कभी घर लौटते प्रवासियों के पैरों में चप्पल बनी तो कभी उनकी उधड़ती एड़ियों पर मरहम. 

तमाम मुश्किलों में इस इंसानियत ने मजबूर इंसानों का हाथ थामे रखा. श्री चंद्रशेखर गुरु पादुका पीठम और श्री रामायण नवान्निका यज्ञ ट्रस्ट भी इसी इंसानियत की झंडाबरदारी करते हैं, जिन्होंने लॉकडाउन के दौरान 6 लाख लोगों को खिलाने के लिए 120 दिनों में 2 करोड़ रुपये खर्च कर दिए.

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ग़रीबों की मदद के लिए Vishnubhatla Anjaneya Chayanulu ने 27 साल पहले इस ट्रस्ट की स्थापना आंध्र प्रदेश के तेनाली में की थी. रिपोर्ट के मुताबिक, लॉकडाउन के दौरान उन्होंने इस ट्रस्ट के ज़रिए लोगों की मदद करने का मन बना लिया. उनके छोटे बेटे विष्णुभटला यज्ञ नारायण अवधानी ने बताया कि, शुरुआत में 50 किलो खाना बनाकर शहर की एक झुग्गी में बांटा गया था. 

हालांकि, वो इस बात से संतुष्ट नहीं थे, क्योंकि ये खाना सभी के लिए पर्याप्त नहीं था. ऐसे में उन्होंने 15 क्षेत्रों की पहचान की, जहां क़रीब 6 हज़ार लोगों ने महामारी के चलते अपना रोज़गार खो दिया था और अब उनके पास खाने-पीने का भी कोई इंतज़ाम नहीं था.

‘हमने लॉकडाउन में रोज़गार गंवा चुके कुछ स्थानीय रसोइयों की पहचान की और उन्हें सैलरी पर काम करने के लिए रखा. उसके बाद खाना बनवाकर उन सभी 15 इलाकों में बांटना शुरू कर दिया.’
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सोशल मीडिया के ज़रिए जब इस बात की जानकारी लोगों को हुई तो देशभर से कई हाथ मदद को आगे आए. उन सभी की मदद से पिछले क़रीब 120 दिनों से लगातार लोगों में खाना बांटने का काम जारी है.

इस परिवार ने लॉकडाउन के दौरान 6 लाख लोगों का पेट भरने के लिए 120 दिनों में 2 करोड़ रुपये खर्च किए हैं.