हम चाहे कितनी भी तरक्की क्यों न कर लें, लेकिन आज भी भारत की स्वास्थ्य सेवाएं राम भरोसे ही हैं. ये घटना राजस्थान के अलवर की है.

दरअसल, स्थानीय लोगों ने NH-8 पर दो बाइक सवार युवकों को एक लड़की को ले जाते देखा. हैरानी वाली बात ये है कि ये दोनों युवक उसे कोटपूतली से करीब 22 किमी दूर अपने घर बहरोड़ लेकर जा रहे थे. इस दौरान इन युवकों को बाइक पर शव ले जाते कई लोगों ने देखा, लेकिन किसी ने भी उनको रोकने या फिर उनकी मदद नहीं की.

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इसके बाद हाईवे से गुज़र रही रवीना नाम की एक महिला ने इसकी शिकायत स्थानीय पुलिस और हाईवे पेट्रोलिंग से की, लेकिन पुलिस ने उनकी शिकायत को अनसुना कर दिया. शिकायत के बावजूद पुलिसकर्मियों ने इन युवकों को रोकने की ज़हमत तक नहीं उठाई.

इस पर पुलिसकर्मियों का जवाब था कि 'यहां तो ये सब चलता रहता है मैडम, आप आराम से जाइये'.

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शिकायतकर्ता महिला के मुताबिक़, वो दिल्ली से जयपुर जा रही थी, इसी दौरान NH-8 पर उसे दो बाइक सवार युवक अपने बीच में एक युवती को ले जाते हुए दिखे. लड़की बेहोश थी और उसने पैर में चप्पल तक नहीं पहनी थी. जब रवीना को मामला किडनैपिंग का लगा, तो उन्होंने तुरंत हाईवे स्थित कोटपूतली क्षेत्र की पुलिस को इसकी जानकारी दी.

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शिकायत के बावजूद जब पुलिस ने इन युवकों को नहीं रोका, तो रवीना ने ख़ुद ही अपनी कार से उनका पीछा किया. इस बीच उन्होंने युवकों को बहरोड़ के जैनपुरबास गांव के करीब रोक लिया. इसके बाद रवीना ने इस संबंध में बहरोड़ पुलिस को भी सूचित किया, लेकिन बहरोड़ से पुलिस के पहुंचने से पहले ही बाइक सवार युवक ये कहते हुए चले गए कि ये हमारे परिवार की लड़की है, बेहोश हो गई थी इसलिए इलाज के लिए लेकर गए थे.

क्या थी इस घटना की असल वजह?

जब मामला पुलिस तक पहुंचा तो पता चला कि ये लोग उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं और परिवार के लोग युवती को इलाज के लिए कोटपूतली लेकर जा रहे थे. इसी दौरान युवती ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया, जिसके बाद ये दोनों युवक बाइक से युवती का शव वापस घर लेकर जा रहे थे.

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युवती को समय पर इलाज मिलना तो दूर, अस्पताल ले जाने लिए ऐम्बुलेंस तक नहीं मिली. अगर युवती को समय पर इलाज मिल पाता, तो शायद वो आज ज़िंदा होती.