भारत की पहली प्राइवेट ट्रेन 'तेजस एक्सप्रेस' भारतीय रेल इतिहास की पहली ऐसी ट्रेन बन गयी है. जिसकी लेट-लतीफ़ी के चलते IRCTC को करीब 1.62 लाख रुपये का हर्जाना भरना पड़ रहा है. 

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हमें ऐसी घटनाएं अक्सर जापान, अमेरिका और फ़िनलैंड जैसे देशों में ही देखने को मिलती थीं. लेकिन भारत में ऐसा पहली बार होने जा रहा है, जब ट्रेन लेट होने पर यात्रियों को किराया भाड़ा रिफ़ंड मिलने जा रहा है. 

दरअसल, बीते 19 अक्टूबर को दिल्ली से लखनऊ चलने वाली 'तेजस एक्सप्रेस' के 3 घंटे से भी अधिक समय की देरी से चलने के कारण अब IRCTC को करीब 1.62 लाख रुपये का हर्जाना भरना पड़ रहा है. रेलवे के इतिहास में ऐसा पहली बार होने जा रहा है जब रेलवे बीमा कंपनियों के ज़रिए अपने 950 यात्रियों को मुआवज़ा देगी.   

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बीते सोमवार यात्रियों ने रेलवे अधिकारियों को सूचित किया कि 'तेजस एक्सप्रेस' लखनऊ से सुबह 6.10 बजे चलने के बजाय सुबह करीब 9.55 बजे चली थी. जबकि नई दिल्ली दोपहर 12.25 बजे पहुंचने के बजाय करीब 3.40 बजे पहुंची थी. इसके बाद ये ट्रेन नई दिल्ली से लखनऊ के लिए दोपहर 3.35 बजे के बजाय शाम 5.30 बजे रवाना हुई थी. जबकि ट्रेन लखनऊ रात 10.05 बजे के बजाय देर रात 11.30 बजे पहुंची थी. 

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इस दौरान यात्रियों को हुई देरी के चलते लखनऊ से दिल्ली जाने वाले सभी 450 यात्रियों को 250-250 रुपए का मुआवज़ा मिलेगा. जबकि दिल्ली से लखनऊ जाने वाले 500 यात्रियों को 100-100 रुपये दिए जाएंगे.   

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इस दौरान रेलवे अधिकारी ने बताया कि यात्री मुआवज़े की राशि बीमा कंपनी की ओर से दिए गए लिंक के ज़रिए हासिल कर सकते हैं. ये लिंक 'तेजस एक्सप्रेस' के हर टिकट पर दर्ज़ होता है. 

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दरअसल, IRCTC अधिक से अधिक लोगों को आकर्षित करने के लिए 'तेजस एक्सप्रेस' में यात्रियों को बेहतरीन बीमा सुविधाएं दे रही है. इस दौरान 'तेजस एक्सप्रेस' प्रत्येक यात्री को 25-25 लाख रुपये का दुर्घटना बीमा भी दे रही है. साथ ही यदि यात्रा के दौरान यात्री के घर में चोरी हो जाती है तो उसके लिए भी 1 लाख रुपये का कवर दिया जायेगा.