अयोध्या की विवादित ज़मीन पर 40 दिनों तक चली मैराथन सुनवाई 16 अक्टूबर को पूरी हो गई थी. सुप्रीम कोर्ट की पांच न्यायाधीशों के बेंच ने आज इस मामले पर अपना फ़ैसला सुनाया.

कोर्ट ने अपने फ़ैसले में विवादित ज़मीन को केंद्रीय सरकार द्वारा गठित एक बोर्ड को सौंप दिया, निर्मोही अखाड़े के दावे का ख़ारिज कर दिया गया और सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड को अलग 5 एकड़ ज़मीन देने की बात की गई है.

इन पांच जजों की कलम से निकला है ये एतिहासिक फ़ैसला.

1. मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई

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मुख्य नयायाधीश रंजन गोगोई फ़ैसला सुनाने वाली बेंच के अध्यक्ष थे. वो आगामी 17 नवंबर को सेवानिवृत्त होने वाले हैं. उन्होंने कई महत्वपूर्ण मामलों पर फ़ैसला सुनाया है.

असम में राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर के पक्ष में फ़ैसला दिया, आयकर मामले में अमिताभ बच्चन को रंजन गोगोई ने राहत दी थी और छात्र नेता कन्हैया कुमार पर कोर्ट परिसर में हुए हमले की जांच की मांग को ख़ारिज कर दिया था.

2. न्यायाधीश शरद अरविंद बोबड़े

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न्यायाधीश रंजन गोगोई के बाद अरविंद बोबड़े ही देश के अगले मुख्य न्यायाधीश होंगे. साल 2013 में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट से सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नति हुई. ये अप्रेल, 2021 में सेवानिवृत्त होंगे.

शरद अरविंद बोबड़े उस संवैधानिक बेंच का हिस्सा थे, जिसने निजता के अधिकार को मौलिक अधिकार बताया था. साथ ही साथ दिल्ली में पटाखों की बिक्री पर बैन लगाने वाली बेंच का भी हिस्सा थे.

3. न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़

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न्यायाधीश धनंजय यशवंत चंद्रचूड़ सुप्रीम कोर्ट के सीनियर जज हैं और उन्हें अपने पिता के फैसले को बदलने के लिए भी जाना जाता है. उनके पिता, न्यायाधीश वाई.वी. चंद्रचूड़ भारत के मुख्य न्यायाधीश रह चुके हैं और उन्होंने साल 1985 में अपने एक फ़ैसले में अडल्ट्री को क़ानूनी रूप से वैध बताया था.

डी.वाई. चंद्रचूड़ ने अपने फ़ैसले में धारा 497, जो कि अडल्ट्री क़ानून को वैधता देती थी, उसे असंवैधानिक बताया. उन्होंने अपने फ़ैसले में बताया कि यह क़ानून महिलाओं के सम्मान को आहत करता है.

वह साल 2016 में सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीश बने थे और उनका कार्यकाल 2024 तक चलेगा.

4. न्यायाधीश अशोक भूषण

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न्यायाधीश अशोक भूषण उत्तरप्रदेश के जौनपुर के रहने वाले हैं. साल 2016 में उन्हें सुप्रीम कोर्ट में नियुक्त किया गया, इससे पहले वो इलाहाबाद हाई कोर्ट और केरल हाई कोर्ट में अपनी सेवा दे चुके हैं. सुप्रीम कोर्ट में उनका कार्यकाल साल 2021 तक का है.

अशोक भूषण कई महत्वपूर्ण फ़ैसलों का हिस्सा रहे हैं, चाहे वो आधार को पैन कार्ड से लिंक करने की अनिवार्यता पर आंशिक रोक हो या पुलिस को सूचना के अधिकार के तहत FIR की कॉपी उपलब्ध कराने की बाध्यता.

5. न्यायाधीश अब्दुल नज़ीर

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न्यायाधीश अब्दलु नज़ीर लगभग 20 सालों तक बतौर अधिवक्ता भी काम कर चुके हैं. इसके पहले वो किसी भी हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश नहीं रहे हैं.

अयोध्या मामले पर बड़ी बेंच द्वारा सुनवाई की पहल अब्दुल नज़ीर ने ही की थी. अब्दूल नज़ीर उस बेंच का हिस्सा थे जिसने तीन तलाक़ पर फ़ैसला सुनाया था, उन्होंने कहा था कि तीन तलाक़ को ख़त्म करने का अधिकार कोर्ट के पास नहीं, संसद के पास है.