जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की हिरासत खत्म करने का फ़ैसला किया गया है. मंगलवार को राज्य सरकार ने उमर अब्दुल्ला की रिहाई का आदेश जारी किया है. उमर को 5 अगस्त 2019 को गिरफ़्तार किया गया था.

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पिछले कुछ समय में जम्मू-कश्मीर के कई नेताओं को एक बॉन्ड पर हस्ताक्षर कराने के बाद रिहा किया गया है. इस बॉन्ड में 'आर्टिकल 370' के ख़िलाफ़ प्रदर्शन न करने की शर्त रखी गई है. इससे पहले उमर अब्दुल्ला के पिता और जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम फ़ारूक अब्दुल्ला को इसी तरह रिहा किया गया था.

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जानकारी दे दें कि जम्मू-कश्मीर से 'आर्टिकल 370' हटाने के बाद 5 अगस्त 2019 को उमर अब्दुल्ला, महबूबा मुफ़्ती समेत कई नेताओं को हिरासत में लिया गया था. इस दौरान उमर अब्दुल्ला पर 'पब्लिक सेफ़्टी एक्ट' (पीएसए) भी लगाया था. उमर पर आरोप था कि उन्होंने अपने फ़ेसबुक के ज़रिए लोगों को भड़काने का काम किया था.

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इस मामले में उमर की बहन सारा अब्दुल्ला ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाख़िल की थी. सारा ने अपनी याचिका में दावा किया था कि उमर के आधिकारिक फ़ेसबुक अकाउंट से कोई पोस्ट नहीं की गई थी. सोशल मीडिया की जिन पोस्ट के आधार पर उमर को हिरासत में लिया गया, उनका उम्र से कोई लेना देना ही नहीं था. लेकिन कोर्ट के समक्ष ग़लत और दुर्भावनापूर्ण तरीके से उन्हें उमर की सोशल मीडिया पोस्ट ठहरा दिया गया.

इस याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर प्रशासन से पूछा था कि अगले सप्ताह तक बताएं कि उमर अब्दुल्ला को रिहा किया जा रहा है या नहीं? साथ ही कोर्ट ने कहा था कि अगर आप उमर अब्दुल्ला को रिहा कर रहे हैं तो उन्हें जल्द रिहा कीजिए या फिर हम हिरासत के ख़िलाफ़ उनकी बहन की याचिका पर सुनवाई करेंगे.

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सरकार के आदेश पर पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) ने कहा कि हम उमर अब्दुल्ला को नज़रबंदी से रिहा करने का स्वागत करते हैं और सरकार से पूर्व सीएम महबूबा मुफ़्ती और अन्य सभी नेताओं को जल्द से जल्द रिहा करने की अपील करते हैं.

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जानकारी दे दें कि पूर्व सीएम नेशनल कॉन्फ़्रेंस के नेता फारूक अब्दुल्ला, आईएएस से राजनेता बने शाह फ़ैसल, पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ़्ती, नेशनल कॉन्फ़्रेंस नेता अली मोहम्मद सागर और पीडीपी नेता सरताज मदनी पर पीएसए लगाया गया था.