पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ को इस्लामाबाद की विशेष अदालत ने देशद्रोह के मामले में मौत की सज़ा सुनाई है. पाकिस्तान के इतिहास में ऐसा पहली बार हो रहा है जब किसी पूर्व राष्ट्रपति को मौत की सज़ा सुनाई गयी है.

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मंगलवार को इस्लामाबाद हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश वक़ार अहमद सेठ की अध्यक्षता में विशेष अदालत की तीन सदस्यीय पीठ ने पूर्व आर्मी चीफ़ मुशर्रफ़ को मौत की सज़ा सुनाई.

पूर्व आर्मी चीफ़ मुशर्रफ़ इस समय बीमारी के चलते दुबई के किसी अस्पताल में भर्ती बताए जा रहे हैं.

क्या था असल मामला?

31 मार्च, 2014 को इस्लामाबाद की विशेष न्यायालय ने देशद्रोह के एक मामले में पाकिस्तान के पूर्व आर्मी चीफ़ परवेज़ मुशर्रफ़ को आरोपी बनाया था. वो पाकिस्तान के इतिहास में पहले ऐसे व्यक्ति थे, जिनके ख़िलाफ़ संविधान की अवहेलना का मुक़दमा चला.

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साल 2013 के चुनावों में भारी जीत के साथ नवाज़ शरीफ़ की 'पाकिस्तान मुस्लिम लीग' सत्ता में आई थी. नवाज़ की सरकार ने सत्ता में आते ही मुशर्रफ़ के ख़िलाफ़ संविधान की अवहेलना का मुक़दमा दायर किया था. हालांकि, मुशर्रफ़ ने ख़ुद कई बार वीडियो जारी करते हुए कहा था कि संविधान की अवहेलना के मामले में उनकी सुनवाई नहीं हो रही है.

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इस दौरान जब परवेज़ मुशर्रफ़ पर आरोप लगाए गए कि वो सिर्फ़ एक बार विशेष न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत हुए. उसके बाद से वो कभी कोर्ट में पेश नहीं हुए. तत्कालीन सत्ताधारी पार्टी मुस्लिम लीग (नून) ने एक्ज़िट कंट्रोल लिस्ट से उनका नाम हटा लिया था जिसके बाद उन्हें देश छोड़कर जाने की अनुमति दे दी गई थी.

इस बीच मार्च 2016 में मुशर्रफ़ स्वास्थ्य कारणों का हवाला देकर विदेश चले गए थे.