अगर आपको सड़कों पर कंटीले तार, बैरिकेडिंग, सीमेंट से बैरिकेडिंग, खाई और नुकीले सरिया वगैरह देखने को मिलें, तो समझ जाइएगा आप दिल्ली बॉर्डर पर हैं. ये सारे इंतज़ाम प्रशासन ने किसान और उनके ट्रैक्टरों को दिल्ली में दाख़िल होने से रोकने के लिए किए हैं. दरअसल, गणतंत्र दिवस पर हुई हिंसा के बाद सरकार ने सिंघु, टीकरी और गाजीपुर बॉर्डर पर सुरक्षा बढ़ा दी है.

इसके पीछे एक वजह ये भी है कि जहां 26 जनवरी को हुई हिंसा के बाद लग रहा था, कि ये आंदोलन अब ख़त्म होने जा रहा है. वहीं, किसान नेता राकेश टिकैत ने आंदोलन को दोबारा खड़ा कर दिया. पश्चिमी उत्तर प्रदेश से लेकर हरियाणा तक महापंचायत हुई, जिसके बाद बड़ी संख्या में गांवों से लोग किसानों के समर्थन में ट्रैक्टर-ट्रॉली लेकर बॉर्डर पर पहुंच रहे हैं.

इस बीच किसान एकता मोर्चा ने एलान किया है कि 6 फरवरी को देशभर में 3 घंटे के लिए चक्का जाम किया जाएगा. ऐसे में पुलिस पर दबाव काफ़ी बढ़ गया है, जिसे देखते हुए सोमवार को पुलिस कर्मियों की निगरानी में श्रमिकों ने सिंघु बॉर्डर पर सीमेंट की दीवारे बनाई और सड़कों पर लोहे की कीले लगाई. इसी के साथ दिल्ली-हरियाणा सीमा पर स्थित हाईवे पर भी रास्ते पर सीमेंट की दीवार खड़ी कर दी गई है. ऐसा इसलिए किया जा रहा है जिससे की आंदोलन में शामिल लोगों की आवाजाही कम की जा सके.

ग़ाज़ीपुर में दिल्ली-उत्तर प्रदेश की सीमा बिल्कुल पुलिस छावनी में तब्दील हो गई है. प्रांतीय सशस्त्र बल (पीएसी) और रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) सहित सैकड़ों सुरक्षाकर्मी मौके पर तैनात हैं. पूरे इलाके की ड्रोन से निगरानी की जा रही है. पूरे बॉर्डर कई लेयर में बैरिकेडिंग की गई है. साथ ही कंटीले तार भी बिछाए गए हैं. 

इसके अलावा दिल्ली पुलिस ने आज भी गाजीपुर बॉर्डर बंद रखा है. जिसके कारण रास्तों पर काफ़ी जाम लग गया है. पुलिस ने आनंद विहार, चिल्ला, डीएनडी, अप्सरा, भोपरा और लोनी बॉर्डर का इस्तेमाल करने की सलाह दी है.

टीकरी बॉर्डर पर भी सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए हैं. मल्टी लेयर बैरिकेडिंग के साथ रास्ते में लंबी नुकीली सरियां गाड़ दी गई हैं, ताकि किसान और उनके ट्रैक्टर इसे पार न कर सकें. किसान और सरकार दोनों के ही रुख को देखकर ऐसा लगता है कि कोई किसी के आगे झुकने को तैयार नहीं है. 

किसान और सरकार दोनों के ही रुख को देखकर ऐसा लगता है कि कोई किसी के आगे झुकने को तैयार नहीं है. 

Source: indiatoday

किसान और सरकार दोनों के ही रुख को देखकर ऐसा लगता है कि कोई किसी के आगे झुकने को तैयार नहीं है.