केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने गुरुवार को सुदर्शन न्यूज़ चैनल को ‘नौकरशाही जिहाद’ नाम के कार्यक्रम को प्रसारित करने की इजाज़त दे दी है. सरकार ने अपने आदेश में कहा है कि कार्यक्रम प्रसारित होने से पहले कार्यक्रम की स्क्रिप्ट नहीं मांगी जा सकती और ना ही उसके प्रसारण पर रोक लगायी जा सकती है.

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दरअसल, दिल्ली हाईकोर्ट ने 28 अगस्त को सुदर्शन न्यूज़ के उस कार्यक्रम पर रोक लगा दी थी, जिसमें चैनल के प्रधान संपादक सुरेश चव्हाणके ने 'नौकरशाही में एक ख़ास समुदाय की बढ़ती घुसपैठ के पीछे कोई षडयंत्र होने' का दावा किया था.

जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी के छात्रों ने इस कार्यक्रम के ख़िलाफ़ एक याचिका दिल्ली हाईकोर्ट में दायर की थी. इस याचिका पर न्यायाधीश नवीन चावला ने सुनवाई करते हुए कार्यक्रम के प्रसारण के ख़िलाफ़ स्टे ऑर्डर जारी किया था.

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मंत्रायल ने भी कहा था कि उसे न्यूज़ चैनल के ख़िलाफ़ शिकायतें मिली हैं और उन्होंने चैनल को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. ताज़ा आदेश में इस बात का ज़िक्र किया गया है कि प्रधान संपादक सुरेश चव्हाणके ने 31 अगस्त को आधिकारिक रूप से अपना जवाब दे दिया था जिसके बाद मंत्रालय ने फ़ैसला किया है कि अगर कार्यक्रम के कंटेंट से किसी तरह नियम-क़ानून का उल्लंघन होता है तो चैनल के ख़िलाफ़ कार्रवाई की जाएगी. लेकिन कार्यक्रम टेलीकास्ट होने से पहले उस पर प्री-सेंसरशिप नहीं लगा सकते.

बता दें, सुदर्शन न्यूज़ ने दावा किया है कि उन्होंने अपने कार्यक्रम में किसी भी नियम का उल्लंघन नहीं किया है. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कंटेंट के आधार पर प्रोग्राम को सेंसर नहीं कर सकते हैं और टेलीकास्ट होने से पहले किसी प्रोग्राम की प्री-सेंसरशिप नहीं कर सकते हैं.

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मंत्रालय ने भी अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि नियमों के अनुसार टीवी कार्यक्रमों पर प्रसारण से पहले रोक नहीं लगाई जा सकती है.. प्री-सेंसरशिप की ज़रूरत फ़िल्म, फ़िल्मी गाने, फ़िल्मों के प्रोमो, ट्रेलर आदि के लिए होती है जिन्हें सीबीएफ़सी से सर्टिफ़िकेट लेना होता है.

हालांकि, मंत्रालय की ओर से चैनल को हिदायत दी गई है कि अगर किसी तरह से प्रोग्राम कोड का उल्लंघन हुआ तो उनके ख़िलाफ़ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है.