भारत के प्रसिद्ध गणितज्ञों में से एक वशिष्ठ नारायण सिंह का गुरुवार को 74 साल की उम्र में निधन हो गया है. बताया जा रहा है कि वो पिछले कई वर्षों से बीमार चल रहे थे. बिहार के पटना मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में उनका इलाज चल रहा था.

दुःख की बात ये रही कि अंतिम समय में उन्हें ऐम्बुलेंस तक नसीब नहीं हुई. मौत के बाद उनका शव अस्पताल कैंपस में स्ट्रेचर पर पड़ा रहा. जब इसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होने लगीं, तब जाकर प्रशासन ने इसकी सुध ली.

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अब बिहार सरकार ने वशिष्ठ नारायण सिंह का अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ करने का ऐलान किया है.

वशिष्ठ नारायण बिहार की राजधानी पटना स्थित एक अपार्टमेंट में गुमनामी का जीवन बिता रहे थे. ये महान गणितज्ञ 44 सालों तक मानसिक बीमारी सिजोफ़्रेनिया से पीड़ित रहे.

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आंइंस्टीन को दी थी चुनौती!

कहा जाता है कि वशिष्ठ नारायण सिंह ने आंइस्टीन के सापेक्षता के सिद्धांत को चुनौती दी थी. हालांकि, अब तक इसके सबूत कहीं नहीं मिल सके हैं.

इस महान गणितज्ञ के बारे में कहा जाता है कि नासा द्वारा अपोलो की लॉन्चिंग से पहले जब सभी कंप्यूटर्स कुछ समय के लिए बंद पद गए थे. कंप्यूटर ठीक होने पर वशिष्ठ नारायण और कंप्यूटर्स की कैलकुलेशन एक जैसी थी.

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कौन थे वशिष्ठ नारायण सिंह?

वशिष्ठ नारायण सिंह का जन्म बिहार के के भोजपुर ज़िले के बसंतपुर गांव में 2 अप्रैल 1942 को एक बेहद ग़रीब परिवार में हुआ था. वो पढ़ाई में इतने तेज़ थे कि उन्होंने अपनी पढ़ाई के आगे ग़रीबी को नहीं आने दिया और दुनियाभर में अपनी कामयाबी के झंडे गाड़े.

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पटना साइंस कॉलेज में पढ़ने के दौरान ही वशिष्ठ नारायण कैलिफ़ोर्निया विवि के प्रो. जॉन कैली की नज़रों में आए. प्रो. जॉन उनकी प्रतिभा को पहचान गए और फिर 1965 में वशिष्ठ नारायण उनके साथ अमेरिका चले गए.

साल 1969 में वशिष्ठ नारायण ने 'कैलिफ़ोर्निया यूनिवर्सिटी' से पीएचडी की. फिर वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी में एसोसिएट प्रोफ़ेसर बने. वशिष्ठ नारायण ने नासा में भी काम किया. लेकिन मन न लगने पर साल 1971 में वापस भारत लौट आए.

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भारत वापस लौटने के बाद वशिष्ठ नारायण सिंह ने आईआईटी कानपुर, आईआईटी बंबई और आईएसआई कोलकाता जैसे बड़े संस्थानों में अपनी सेवाएं दी थीं.

सोशल मीडिया पर भी कई बड़ी शख़्सियत वशिष्ठ नारायण सिंह के जाने पर दुःख जाता रहे हैं-