16 वर्षीय स्वीडिश क्लाइमेट एक्टिविस्ट ग्रेटा थुनबर्ग को नोबेल शांति पुरस्कार के लिये नॉमिनेट किया गया है. ग्रेटा थुनबर्ग उन सभी लोगों के लिये जवाब है, जो कहते हैं कि दुनिया बदलने के लिये तजुर्बा होना ज़रूरी है.

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रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल ग्रेटा जलवायु परिवर्तन (ग्लोबल वॉर्मिंग) रोकने के दिशा में कदम उठाते हुए 'स्कूल स्ट्राइक' कर स्वीडिश संसद भवन के सामने धरने पर बैठ गई थी. इस काम में ग्रेटा को अन्य छात्र-छात्राओं का भी सहयोग मिला और सभी ने जमकर अभियान का समर्थन किया. यही नहीं, अभियान को सफ़ल बनाने के लिये 16 साल की इस लड़की ने स्कूल तक जाना बंद कर दिया था और आख़िरकार ग्रेटा की मेहनत रंग लाई, जिसके बाद इस अभियान ने न सिर्फ़ यूरोप, बल्कि दुनियाभर में ख़ूब सुर्ख़ियां बंटोरी.

इसके अलावा ग्रेटा ने दिसंबर 2018 में पोलेंड में हुई UN क्लाइमेट चेंज कॉन्फ़्रेंस में भी जलवायु परिवर्तन को लेकर ज़बरदस्त भाषण दिया था और इस तरह से वो दुनिया की नज़र में एक स्टार बन कर उभरी. ग्रेटा की उम्र देखते हुए भले ही उसे अभी दुनिया की तमाम चीज़ों का अनुभव न हो, पर ग्लोबल वॉर्मिंग को लेकर उसकी सोच उसे बाकियों से काफ़ी बड़ी है.

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नोबल के लिये नामांकित हुई ग्रेटा का कहना है कि हम सभी को धरती के नीचे मौजूद तेल और खनिज भंडारों को सुरक्षित रखने की ज़रूरत है. इसके साथ ही हमें दुनिया में समानता लाने की ओर भी ध्यान देना चाहिये और अगर हम सिस्टम के अंदर रह कर समाधान नहीं खोज सकते, तो फिर हमें पूरा सिस्टम ही बदल देना चाहिये. ग्रेटा ने कम उम्र में अपने भाषण के ज़रिये दुनिया की तमाम बड़ी-बड़ी हस्तियों को हैरान कर दिया था. यही नहीं, ग्लोबल वार्मिंग को लेकर उसने प्रधानमंत्री मोदी से भी सख़्त कदम उठाने की मांग की थी.

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स्वीडन की रहने वाली ग्रेटा का नाम नोबेल के लिये तीन Norwegian Lawmakers द्वारा आगे लाया गया है.