महाराष्ट्र का पुणे शहर भारत की विरासत और भव्य इतिहास का प्रतिक रहा है. ऐसे तो पुणे शहर शिवाजी महाराज से लेकर स्वातंत्रा संग्राम में अपना महत्वपूर्ण योगदान देने के लिए हमेशा ही जाना जाएगा. मगर शहर अपने 'पेठ' के लिए भी काफी जाना जाता है.  

पेठ, एक इलाके के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला शब्द है. 

पुणे शहर में कुल 17 पेठ हैं. ये पेठ मुख्य रूप से मराठों और पेशवाओं के राज के दौरान बनाए गए थे. उनमें से 7 पेठ के नाम सप्ताह के दिनों पर रखे गए हैं. अन्य पेठों का नाम पेशवाओं के समय के शासकों या प्रसिद्ध हस्तियों के नाम पर रखा गया है. आइए शहर के कुछ प्रसिद्ध पेठों के बारे में जानकारी लेते हैं.

1. कस्बा पेठ  

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ये पेठ 14वीं शताब्दी में स्थापित होने वाला पहला और शहर का सबसे पुराना इलाक़ा है. इसे चालुक्य राजाओं द्वारा बनाया गया था. आज ये कस्बा गणपति मंदिर और लाल महल के लिए प्रसिद्ध है.

2. सोमवार पेठ  

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पहले इस पेठ को 'शाहपुरा' के नाम से जाना जाता है. जबकि इस क्षेत्र में रहने वाले लोगों को 'गोसावी' कहा जाता था. ये लोग बैंकों के अस्तित्व में आने से पहले पैसा उधार पर देने का काम किया करते थे.   

3. मंगलवार पेठ  

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इस पेठ को पहले 'शाइस्तेपुरा' कहा जाता था. आज ये जगह परिवहन व्यापार के लिए बहुत प्रसिद्ध है.

4. बुधवार पेठ  

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ये जगह औरंगज़ेब के शासन में 'मोहिताबाद' के नाम से जानी जाती थी. जब पेशवाओं ने पदभार संभाला, पेशवा बालाजी विश्वनाथ ने इसे 1703 में विकसित किया था. बुधवार पेठ आज शहर का सबसे व्यस्त इलाक़ा है.  

5. गुरुवार पेठ  

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1730 में बना ये पेठ पहले 'विठल पेठ' के नाम से जाना जाता था क्योंकि इलाक़े में विठल मंदिर है. ये स्थान हाथी से लड़ने वाले शो के लिए भी प्रसिद्ध था.

6. शुक्रवार पेठ  

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पहले शुक्रवार पेठ को 'विसापुर' के नाम से जाना जाता था. ये शहर का सबसे बड़ा पेठ है. 1734 में श्रीमंत बालाजीराव पेशवा के शासन में जीवजीपंत खसगिवले द्वारा शुक्रवार पेठ का निर्माण किया गया था. ये 1748-49 के दौरान पुनः स्थापित किया गया था. पुणे का प्रसिद्ध बाज़ार 'मंडई' शुक्रवार पेठ में ही है जिसे 1885 में बनाया गया था.

7. शनिवार पेठ  

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पुणे का ऐतिहासिक स्थान 'शनिवार वाड़ा' शनिवार पेठ में ही स्थित है. जब पुणे मुस्लिम शासन के अधीन था तब इस स्थान को मुरुज़ाबाद या मुर्तुज़ाबाद के नाम से जाना जाता था. जैसे ही पेशवाई पुणे में शुरू हुई थी, इस जगह को शनिवार पेठ के नाम से लोग जानने लगे.

8. रविवार पेठ  

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'मलकापुर' रविवार पेठ का प्राचीन नाम था. ये क्षेत्र सोने और चांदी के आभूषणों की दुकानों के लिए बहुत प्रसिद्ध है. प्लास्टिक उत्पाद का बाज़ार यहां पाया जाता है. 'लक्ष्मीनारायण' और 'राम मंदिर' के मंदिर भी इस क्षेत्र में प्रसिद्ध हैं.  

9. सदाशिव पेठ  

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इस पेठ का नाम 'सदाशिव पेठ' पानीपत युद्ध के नायक 'सदाशिवराव भाऊ' की याद में पड़ा है. सदाशिवराव 1761 के युद्ध में शहीद हो गए थे. इस जगह पर प्रसिद्ध 'सरस बाग' और 'विश्रामबाग वाड़ा' है.  

10. नाना पेठ  

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'निहाल पेठ' नाना पेठ का प्राचीन नाम था. 1761 में इसका नाम 'नाना फ़डणवीस' की स्मृति में रखा गया है. नाना पेठ में आज किराना होलसेल का मार्केट लगता है और ऑटोमोटिव स्पेयर पार्ट्स का बाज़ार भी है. 

11. गणेश पेठ  

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इस पेठ को 1755 में 'पेशवा सवाई माधव राव' द्वारा 1755 में स्थापित किया गया था. इस पेठ का नाम भगवान गणेश से प्रेरित है.  

12. भवानी पेठ  

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इसका नाम देवी भवानी के नाम पर रखा गया है, जिनका मंदिर यहां 1763 में स्थापित किया गया था. पुराने दिनों में इस क्षेत्र में कई सारे बेर के पेड़ थे इसलिए इसे 'बेरवन' के नाम से भी जाना जाता था. आज ये एक बड़ा लकड़ी, हार्डवेयर और स्टील बाज़ार है.

13. घोरपडे पेठ 

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घोरपडे पेठ का नाम 'सरदार घोरपडे' की स्मृति के नाम पर रखा गया है. आज ये एक आवासीय क्षेत्र है. 

14. नारायण पेठ 

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नारायणराव पेशवा ने 1773 में सत्ता में आने पर 'नारायण पेठ' का निर्माण किया था. नारायण पेठ का गायकवाड़ वाड़ा वो स्थान है जहां लोकमान्य तिलक ने 'केसरी' नामक दैनिक समाचार पत्र शुरू किया था. इस स्थान को अब 'गायकवाड़ वाड़ा' या 'केसरी वाड़ा' के नाम से जाना जाता है.

15. गंज पेठ 

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ये पेठ सवाई माधवराव पेशवा के शासन में एक वाणिज्यिक केंद्र था. इसे मुज़फ्फरगंज के नाम से जाना जाता था. बाद में इसे 'गंज' में छोटा कर दिया गया और अब इसे महात्मा फुले पेठ के नाम से भी जाना जाता है.  

16. नवी पेठ  

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ये लाल बहादुर शास्त्री मार्ग से जुड़ा प्रसिद्ध ब्राह्मण पेठ है और ये पुणे का सबसे नवीनतम पेठ है.  

17. रास्ता पेठ  

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पहले रास्ता पेठ को 'शिवपुरी' के नाम से जाना जाता था. ये वर्ष 1776 में बनाया गया था. रास्ता पेठ का नाम 'सरदार आनंदराव लक्ष्मणराव' की स्मृति में रखा गया था.