भारत में कोरोना वायरस से संक्रमित मरीज़ों की संख्या 6900 के क़रीब पहुंच चुकी है. जबकि अब तक 228 लोगों की मौत हो चुकी है. हालांकि, इस वायरस से संक्रमित 641 लोग पूरी तरह से ठीक भी हुए हैं.   

इस बीच ‘इंडियन काउंसिल फ़ॉर मेडिकल रिसर्च’ (ICMR) ने देश को भयानक ख़तरे के संकेत दिए हैं. ICMR ने कहा कि भारत में कोरोना वायरस की तीसरे स्टेज यानी ‘कम्युनिटी ट्रांसमिशन’ का ख़तरा बढ़ गया है. 

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‘इंडियन काउंसिल फ़ॉर मेडिकल रिसर्च’ द्वारा देशभर के अलग-अलग ज़िलों से लिए गए कोरोना वायरस संक्रमितों के नमूनों और उनकी केस हिस्ट्री की जानकारी में जो आंकड़े सामने आए हैं, उससे देश में ‘कम्युनिटी ट्रांसमिशन’ का ख़तरा तेज़ी से बढ़ रहा है. हालांकि, ICMR ने 20 दिन पहले कहा था कि भारत में कम्युनिटी ट्रांसमिशन का ख़तरा न के बराबर है. 

दरअसल, ICMR की टीम ने 15 फ़रवरी से 2 अप्रैल के बीच कोरोना संक्रमित 5,911 मरीज़ों का सीवियर एक्यूट रेसपिरेटरी इलनेस टेस्ट किया था. इस दौरान 104 लोग कोरोना पॉज़िटिव पाए गए. ये सभी मरीज़ 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश के 52 ज़िलों से थे. जांच में ये भी पता चला कि पॉज़िटिव मरीज़ों में से 40 मरीज़ ऐसे भी थे जिन्होंने न तो कोई विदेश यात्रा की, न ही इनका संबंध कभी किसी विदेशी यात्री से रहा. 

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इस दौरान देश के 15 राज्यों के 36 ज़िलों में ऐसे मरीजों में कोरोना के संक्रमण देखने को मिले हैं, जिनकी कोई ट्रैवल हिस्ट्री नहीं थी. इसका साफ़ मतलब है कि भारत में ‘कम्युनिटी ट्रांसमिशन’ बढ़ चुका है. अगर समय रहते इसकी रोगथाम नहीं की तो भविष्य में नतीजे डरावने हो सकते हैं. 

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ICMR ने अपनी रिपोर्ट में सरकार से गुजरात, तमिलनाडु, महाराष्ट्र और केरल जैसे राज्यों पर अधिक ध्यान देने की बात कही है. इस दौरान गुजरात के 792 गंभीर रूप से बीमार लोगों की जांच की, इनमें से 13 मामले कोरोना पॉज़िटिव पाए गए. तमिलनाडु में 577 लोगों की जांच की गई, जिसमें से 5 लोग कोरोना पॉज़िटिव निकले. इसी तरह महाराष्ट्र में 553 में से 21 लोग कोरोना पॉज़िटिव पाए गए. जबकि केरल में 502 में से 1 शख़्स करोना पॉज़िटिव पाया गया. 

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आख़िर होता क्या है कम्युनिटी ट्रांसमिशन?

‘कम्‍युनिटी ट्रांसमिशन’ किसी भी वायरस की थर्ड स्‍टेज होती है. इस दौरान वायरस किसी समुदाय में घुसकर बड़ी संख्या में लोगों को अपनी चपेट में ले लेता है. कम्युनिटी ट्रांसमिशन में कोई ऐसा व्यक्ति भी संक्रमित हो सकता है जो न तो कोरोना प्रभावित देश से लौटा हो और न ही किसी कोरोना संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आया हो. इस स्टेज में ये पता नहीं चलता कि कोई व्यक्ति कैसे संक्रमित हुआ है.

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ICMR की रिपोर्ट में कहा गया है जिन ज़िलों में इस तरह के मरीज़ ज़्यादा देखने को मिल रहे हैं. वहां हमें अधिक सतर्क रहने की ज़रूरत है. हालांकि, ICMR ने 14 मार्च को कोरोना के ख़तरे को लेकर जो रिपोर्ट दी थी उसमें कम्युनिटी ट्रांसमिशन के खतरे को नकार दिया गया था, लेकिन अब जो रिपोर्ट सौंपी है उसके संकेत डरावने हैं.