भारत में कोरोना महामारी का कहर जारी है. देश में अब तक 69 लाख़ से अधिक लोग कोरोना से संक्रमित हो चुके हैं, जबकि 1 लाख से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है. वहीं 59 लाख से अधिक लोग ठीक भी हो चुके हैं. 

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इस बीच केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने आयुर्वेद और योग के ज़रिये कोरोना के बिना लक्षण या मामूली लक्षण वाले मरीज़ों के इलाज को औपचारिक मंजूरी देने का ऐलान किया है, लेकिन 'इंडियन मेडिकल एसोसिएशन' (IMA) हर्षवर्धन के इस फ़ैसले से नाखुश नज़र आ रही है. 

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देश में डॉक्टरों की सबसे बड़ी संस्था 'इंडियन मेडिकल एसोसिएशन' ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन पर कई सवाल दागे हैं. संस्था ने पूछा है कि केंद्र सरकार ने किस आधार पर आयुष के ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल से कोरोना के इलाज की मंज़ूरी दी है?

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इस दौरान 'इंडियन मेडिकल एसोसिएशन' ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन से कुछ महत्वपूर्ण सवाल पूछे हैं-   

-क्या आयुर्वेद और योग से कोरोना के मरीज़ों के इलाज को लेकर कोई रिसर्च की गई है?


-सरकार के कितने मंत्री और सहयोगियों ने ख़ुद आयुर्वेद और योग से अपना इलाज करवाया है?

-अगर ये असरदार है तो कोविड केयर और कंट्रोल आयुष मंत्रालय को सौंपने से उन्हें कौन रोक रहा है?

-मंत्रालय ये भी बताए कि कोरोना का गंभीर रूप हाइपर इम्यून स्टेटस है या इम्यून डेफिशियेंसी स्टेटस?

-क्या स्वास्थ्य मंत्रालय आयुष प्रोटोकॉल के डबल ब्लाइंड स्टडी यानी दो तरफ़ा नियंत्रित अध्ययन के लिए तैयार है? 

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'इंडियन मेडिकल एसोसिएशन' ने साफ़ तौर पर कह दिया है कि, इस मामले में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री अपना पक्ष साफ़ करें और सवालों के जवाब दें. अगर वह ऐसा नहीं करते हैं तो वो लोगों में एक फ़र्ज़ी दवा को लेकर भ्रम फ़ैला रहे हैं. 

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बता दें कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने मंगलवार को 'नेशनल कोविड ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल' में आयुर्वेद और योग को औपचारिक रूप से शामिल करने की घोषणा की थी, जबकि पहले से ही अनौपचारिक तौर पर इन पद्धतियों का भी इस्तेमाल हो रहा है.