कुछ शख़्सियतों की कहानियां पढ़ने के बाद ये ख़याल कई बार मन में आता ही होगा कि ये असल ज़िन्दगी में कैसे होंगे. बोलते कैसे होंगे, चेहरे के हाव-भाव कैसे होंगे, खाते कैसे होंगे, चलते कैसे होंगे आदि. 

तस्वीरों में बहुत कुछ पता चल जाता है लेकिन इतनी बारीकियां नहीं समझ आती. न ही कई बार ऐसी शख़्सियतों को क़रीब से जानने वालों की बातें मानने का मन करता है. देश के लिए अपना सर्वस्व देने वाले क्रांतिकारियों, एक से एक अच्छी रचनाएं लिखने वाले मशहूर लेखकों और हमारी ज़िन्दगी आसान बनाने वाले वैज्ञानिकों के बारे में पढ़ो तो ऊपर लिखे ख़याल हमेशा ही आते हैं.

एक तकनीक ने कुछ हद तक हमारी क्यूरियोसिटी का हल ढूंढ लिया है. AI तकनीक के ज़रिए तस्वीरों के हाव-भाव गढ़े जा सकते हैं. इस तकनीक से बनाए गए फ़नी वीडियोज़ तो आपने भी देखे ही होगे.

इस तकनीक के ज़रिए कुछ 'कन्सट्रक्टिव काम' भी किया गया है. तकनीक प्रेमियों ने हमारे क्रांतिकारियों, गुरुओं, वैज्ञानिकों की तस्वीरें सजीव करने की कोशिश की है.

ट्विटर पर कीर्तिक ससीधरन नामक शख़्स ने एक ट्विटर थ्रेड अपलोड किया जिसमें भगत सिंह, स्वामी विवेकानंद, बाल गंगाधर तिलक, कस्तूरबा गांधी, गुरू अरविंदो, मुंशी प्रेमचंद के वीडियोज़ डाले जिसमें ये शख़्सियतें एकदम जीवित लग रही हैं.

एक दूसरे ट्विटर यूज़र, रामनाथ ने श्रीनिवास रामानुजन की फ़ोटो डाली.

लोगों की प्रतिक्रिया-

हम तो बार-बार ये तस्वीरें देख रहे हैं. तस्वीरें देखकर, आपको कैसे लगा कमेंट बॉक्स में बताइए.