नोट: ये लेख हमने सारी फ़ुटेज देख कर लिखा है. इसमें हम न तो पुलिस की साइड ले रहे हैं, न ही ऑटोचालक की. हमने घटना को निष्पक्ष तौर पर सामने रखने की कोशिश की है.

बीते रविवार को दिल्ली के मुखर्जी नगर में पुलिस द्वारा एक ऑटो चालक और उसके नाबालिग बेटे को बुरी तरह पीटने का वीडियो सामने आया.

पहला पहलू

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस वीडियो में कुछ पुलिसवालों और एक सिख ऑटो चालक, उसके नाबालिग बेटे के बीच किसी बात को लेकर कहा-सुनी होती दिख रही है. कुछ देर की कहा-सुनी के बाद ऑटो चालक गुस्से में अपनी कृपाण निकालकर पुलिसवालों के पीछे दौड़ता दिख रहा है.

इसके बाद छह-सात पुलिसवाले इस ऑटो चालक को लाठी-डंडों और लात-घूसों से पीटने लगते हैं. इस दौरान पिता का बचाव कर रहे ऑटो चालक के नाबालिग बेटे पर भी पुलिस जमकर लाठियां बरसाती है. ये वीडियो का पहला भाग था.

घटना दिल्ली के मुखर्जी नगर की बताई जा रही है. सरबजीत सिंह ग्रामीण सेवा (ऑटो) के चालक हैं. मुखर्जी नगर में पुलिस वालों से उनकी किसी बात को लेकर झड़प हो गई थी. इस दौरान दो पुलिस कर्मियों ने उनके साथ अभद्रता की, जिस पर सरबजीत को मजबूरन अपनी कृपाण निकालनी पड़ी. सरबजीत के कृपाण निकालने के बाद पुलिसवाले भी गुस्सा गए और मामला बढ़ने लगा.

दूसरा पहलू

वीडियो के दूसरे भाग को देखकर समझ आ रहा है कि इस घटना के लिए दोनों पक्ष ज़िम्मेदार हैं. पुलिसवाले ऑटो चालक को काबू में करने की कोशिश करते हैं लेकिन वो बराबर उनसे लड़ता हुआ दिख रहा है. इसी बीच ऑटो चालक का बेटा पीछे से ऑटो लेकर पुलिसवालों पर ठोकने की कोशिश करता है. इसके बाद पुलिसवाले ऑटो चालक की जमकर पिटाई करते हैं. ऑटो चालक और उसके बेटे, दोनों को रगड़ते हुए थाने ले जाने की कोशिश की जाती है.

इस घटना का एक राजनीतिक पहलू भी है

'गुरुद्वारा सिख प्रबंधक कमेटी' से मनजिंदर सिंह सिरसा भी घटना के बाद मुखर्जी नगर थाने के पास पहुंचे और सिख व्यक्ति की पिटाई और पग के अपमान के कारण पुलिसकर्मियों पर हत्या की कोशिश का मुकदमा दर्ज करने की मांग करने लगे. दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी ऑटो चालाक की बेरहमी से पिटाई को लेकर आरोपी पुलिसकर्मियों पर सख्त कार्रवाई और निष्पक्ष जांच की मांग की.

Source: jagran

इलाके के डीसीपी ने घटना के ज़िम्मेवार तीन पुलिसवालों, ASI संजय मलिक, ASI देवेंदर और कांस्टेबल पुष्‍पेन्‍द्र को तत्‍काल प्रभाव से निलंबित कर दिया.

पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने ऑटो चालक सरबजीत और उसके बेटे बलवंत की बर्बरतापूर्वक पिटाई को लेकर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मामले में पीड़ितों को उचित न्याय दिलाने की मांग की है.

हालांकि पुलिस ने सरबजीत के ख़िलाफ़ भी विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया. इसी फ़ैसले के बाद बड़ी संख्या में सिख समुदाय के लोग सड़कों पर उतर आए. मुखर्जी नगर थाने के बाहर लोग हंगामा और प्रदर्शन करने लगे. इस दौरान उग्र भीड़ ने असिस्टेंट पुलिस कमिश्नर की पिटाई भी कर दी.

हमारा पक्ष

निस्संदेह इस घटना में पुलिस का बर्ताव सही नहीं था लेकिन दूसरा पक्ष ये भी है कि पब्लिक प्लेस पर तलवार निकालकर पुलिसवालों को दौड़ाना, धमकाना और उन पर हमला करना भी ठीक नहीं है. इस पूरे घटनाक्रम के दौरान एक पुलिस वाला भी घायल बताया जा रहा है.

ये घटना इतनी बड़ी नहीं होती अगर दोनों में से एक पक्ष भी संयम से काम लेता. ग़लती दोनों तरफ़ से हुई. इस पूरी घटना में बीच-बचाव करने उतरे एक व्यक्ति (जो वीडियो में सफ़ेद शर्ट में दिख रहे हैं. वो पुलिस वाले हैं या नहीं, ये नहीं कहा जा सकता) ने ही मामले को संभालने की कोशिश की और उन्हें भी चोटें आयी.

मामले की निष्पक्ष जांच होनी ज़रूरी है और दोषी पाए गये सभी लोग सज़ा के हक़दार हैं.