जहां एक तरफ़ हमारे प्रधानमंत्री देश को डिजिटल भारत बनाने की बात करते हैं और इसके लिए हर रोज़ नए प्रोग्राम शुरू किए जाते हैं, ई-वॉलेट के इस्तेमाल पर ज़ोर दिया जाता है. वहीं इंटरनेट से जुड़े नए आंकड़े आपको चौंका देंगे.

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मगर इस ख़बर को बताने से पहले थोड़ी भूमिका बनानी तो बनती है, आखिर प्रधानमंत्री जी से हमने भी तो कुछ सीखा होगा. तो शुरू करते हैं.

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हमारा देश दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है, जिसके बारे में किसी को कोई शक़ नहीं होना चाहिए. जहां बोलने की, सोचने की आज़ादी है. अपनी बात रखने की आज़ादी है, जहां जनता ही सर्वोपरी है. लेकिन क्या सच में ऐसा है? इंटरनेट के बारे में नए आंकड़े अगर आप सुनेंगे तो आप भी इस आज़ादी पर सवाल खड़ा करने लगेंगे.

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दरअसल, एक आंकड़े के अनुसार साल 2021 जिसके शुरू हुए अभी कुछ वक़्त ही बीता है. और साल की शुरुआत में ही हमारा देश इंटरनेट बंद करने में दुनिया में पहले स्थान पर पहुंच गया है. बीते कुछ दिनों में सिंघु बॉर्डर, गाज़ीपुर बॉर्डर और टिकरी बॉर्डर पर इंटरनेट को 10 बार बंद किया गया. कारण बताने की ज़रूरत नहीं. 

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इतना ही नहीं साल 2020 में देश में इंटरनेट सेवा को 8 हज़ार 9 सौ 27 घंटों के लिए बंद किया गया था, जिस कारण देश को करीब 2.8 बिलियन रुपयों का नुकसान हुआ. 

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साल 2019-20 को जोड़ें तो ये हालात और ख़राब दिखते हैं. जब करीब 164 बार देश के अलग-अलग हिस्सों में इंटरनेट सेवा को बाधित किया गया.

ये मामला पहली नज़र में बड़ा नहीं दिखता, शायद इस ख़बर से आपको फ़र्क भी नहीं पड़ेगा, लेकिन सोचने की बात ये है कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश में सरकार का तानाशाही रवैया दिखने लगा है. सूचना के अधिकार का हनन हुआ है.

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 सिर्फ़ कश्मीर में इंटरनेट की सुविधा 552 दिनों के लिए बंद रखी गई. ये दुनिया में किसी भी लोकतांत्रिक देश द्वारा किया गया सबसे लम्बे समय के लिए इंटरनेट बंद करने की घटना है.

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सरकार अपने इस फ़ैसले को लेकर कितने भी तर्क दे, लेकिन उसके इस कदम से देश का मान ज़रूर घटा है. ख़ुद को देश भक्त कहने वाली इस सरकार के इस फ़ैसले से हम लोकतांत्रिक समाज पर कई पायदान नीचे आ गए हैं. अब देखना सिर्फ़ इतना है कि ये सरकार बचे सालों में अपनी इस रैंकिंग को सुधारती है या इस साल भी दुनियाभर की इस लिस्ट में हम नंबर वन ही रहते हैं.