केंद्र सरकार ने रेलवे में निजीकरण की तरफ़ पहला बड़ा क़दम उठा लिया है. रेल मंत्रालय ने देशभर के 109 रूटों पर 151 निजी यात्री ट्रेनें चलाने के लिए प्राइवेट कंपनियों को आमंत्रित किया है. ये पहली बार है जब रेलवे ने निजी कंपनियों से भी ट्रेन चलाने के लिए टेंडर मंगाए हैं. 

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मंगलवार को रेलवे ने पैसेंजर ट्रेन सर्विस ऑपरेट करने के लिए प्राइवेट कंपनियों के लिए दरवाज़े खोल दिए हैं. इस दौरान प्राइवेट कंपनियां रेलवे के 12 ज़ोन के 109 रूट पर चलने वाली इन ट्रेनों को ऑपरेट कर पाएंगी. इससे 30 हज़ार करोड़ रुपये के इन्वेस्टमेंट की संभावना है. आईआरसीटीसी फ़िलहाल देश में 2 निजी 'तेजस ट्रेनों' का संचालन कर रहा है. 

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भारतीय रेलवे ने 35 सालों के लिए ये प्रोजेक्ट प्राइवेट कंपनियों को देगी. इस दौरान ट्रेन के परिचालन व रखरखाव की ज़िम्मेदारी निजी ऑपरेटर्स की होगी. ऑपरेटर्स को एनर्जी और हौलेज चार्ज खपत के हिसाब से देना होगा. निजी कंपनियां द्वारा ट्रेनों का संचालन समय की पाबंदी, विश्वसनीयता, ट्रेनों के रखरखाव आदि के अनुरूप ही करना होगा. 

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क्या ख़ास बात होगी इन निजी यात्री ट्रेनों की? 

क्या ख़ास बात होगी इन निजी यात्री ट्रेनों की? इन सभी ट्रेनों के डिब्‍बे 'मेक इन इंडिया' होंगे. सभी ट्रेन कम से कम 16 कोच की होंगी. इन ट्रेनों की अधिकतम रफ़्तार 160 किलो मीटर/घंटा होगी. इन निजी ट्रेनों में यात्रियों को सुरक्षा के साथ ही विश्व स्तरीय सुविधाएं भी मिलेंगी. सभी रेल गाड़ियों में ड्राइवर और गार्ड भारतीय रेलवे के होंगे. 

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इंडियन रेलवे के मुताबिक़, इसका मकसद भारतीय रेल में नई तकनीक का विकास करना है, ताकि मेंटेनेंस कॉस्ट को कम किया जा सके. इसके अलावा रेलवे का दावा है कि इससे नई नौकरियों के अवसर भी पैदा होंगे.