शहीदों की चिताओं पर जुड़ेंगे हर बरस मेले

वतन पर मिटने वालों का यही बाकी निशां होगा II
हर देशवासी के दिल में जोश और जज़्बा भर देने वाली ये चंद लाइनें आपको राजधानी दिल्ली में बने देश के पहले 'राष्ट्रीय युद्ध स्मारक' के अमर जवान ज्योति पर लिखी मिल जाएंगी.

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आज़ादी के बाद से देश के लिए अपने प्राण न्यौछावर करने वाले जांबाज़ सैनिकों के सम्मान में इंडिया गेट के पास 'राष्ट्रीय युद्ध स्मारक' बनाया गया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस वॉर मेमोरियल का उद्घाटन करेंगे. इस मौके पर रक्षा मंत्री, सेना, नौसेना और वायु सेना प्रमुख समेत कई गणमान्य लोग भी उपस्थित रहेंगे .

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इंडिया गेट के पास करीब 40 एकड़ में फ़ैला ये युद्ध स्मारक 176 करोड़ रुपये की लागत में बनकर तैयार है. इसे बनाने में सिर्फ़ एक साल का वक़्त लगा. इस वॉर मेमोरियल की 16 दीवारों पर 25,942 योद्धाओं की वीरगाथाओं का ज़िक्र किया गया है. ग्रेनाइट पत्थरों पर शहीदों के नाम, रैंक व रेजिमेंट का उल्लेख किया गया है.

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इस वॉर मेमोरियल की ख़ास बात ये है कि इसे चक्रव्यूह की संरचना से प्रेरणा लेते हुए बनाया गया है. इसमें चार वृत्ताकार परिसर हैं जिनको अमर चक्र, वीरता चक्र, त्याग चक्र व रक्षक चक्र नाम दिया गया है. जबकि इनके बीच में एक ऊंचा स्मृति स्तंभ भी है जिसके नीचे शहीदों के साहस और बलिदान की याद में अखंड ज्योति जलती रहेगी. इस स्मारक को आर्टिफ़िशियल लाइटिंग के जरिये सजाया गया है. इसमें एक वॉकिंग प्लाज़ा भी है.

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'राष्ट्रीय युद्ध स्मारक' परिसर में प्रवेश सभी के लिए नि: शुल्क है, लेकिन मुख्य क्षेत्र और परम योद्धा स्टाल में समय की पाबंदी होगी. साथ ही यहां पर हर शाम रिट्रीट सेरेमनी भी होगी.

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ये स्मारक देश के उन वीर जवानों श्रद्धांजलि देता है, जिन्होंने 1962, 1965, 1971 और 1999 की जंग में देश की ख़ातिर अपनी जान की बाज़ी लगा दी थी. उन वीर सैनिकों के लिए इससे बड़ा सम्मान और क्या हो सकता था.