कोरोना वायरस के चलते जारी लॉकडाउन की वजह से सभी सेक्टर बुरी तरह से प्रभावित हैं. ऐसे में लाखों लोगों की नौकरियां चली गई हैं. जबकि करोड़ों लोग बेरोज़गारी की कगार पर पहुंच गए हैं.  

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, देश के क़रीब 2 लाख शिक्षकों को पिछले 2-3 महीनों से वेतन नहीं मिला है. जिनमें 10 हज़ार मान्यता प्राप्त शैक्षणिक संस्थानों और 8 हज़ार गैर मान्यता प्राप्त शैक्षणिक संस्थानों के टीचर शामिल हैं. 

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लॉकडाउन के चलते केवल असंगठित क्षेत्र के मज़दूर ही बेरोज़गार नहीं हुए हैं. बेरोज़गारी की मार शिक्षित वर्ग पर भी पड़ी है. आज स्थिति ऐसी हो गई है कि देश का भविष्य बनाने वाले शिक्षकों और लाखों कमाने वाले आईटी प्रोफ़ेशनल्स को भी मनरेगा की दिहाड़ी के भरोसे जीवन यापन करना पड़ रहा है.  

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तेलंगाना का एक शिक्षक दंपत्ति चिरंजीवी और पद्मा भी इन्हीं लोगों में से एक हैं, जो इन दिनों बेरोज़गार हैं. कुछ समय पहले तक ये दोनों टीचर हुआ करते थे, लेकिन इन दिनों परिवार का पेट पालने के लिए मनरेगा के तहत दिहाड़ी मज़दूरी करने को मजबूर हैं. अब इन्हें हर रोज सुबह स्कूल के बजाय काम की साइट पहुंचना होता है.  

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चिरंजीवी ने बीएड किया है और वो सोशल साइंस के टीचर हैं. जबकि पद्मा ने एमबीए किया और वो एक प्राइमरी स्कूल में टीचर थीं. लेकिन पिछले 2 महीनों से इन्हें सैलरी नहीं मिली है. इसके चलते इन्हें अपना घर चलाने के लिए मनरेगा के तहत मज़दूरी करनी पड़ रही है.  

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एनडीटीवी से बातचीत में चिरंजीवी कहते हैं कि, मनरेगा के तहत हमें 200 से 300 रुपए की दिहाड़ी मिल पाती है. इस पैसे से सिर्फ़ राशन और सब्ज़ी ही ख़रीद पाते हैं. हमारे परिवार में 2 बच्चों और माता-पिता को मिलाकर कुल 6 लोग हैं. पिछले 2 महीनों से बिना सैलरी के बड़ी मुश्किल से घर चल पा रहा है.   

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आईटी कंपनियों में काम करने वाले प्रोफ़ेशनल्स की स्थिति भी कुछ ऐसी ही है. कुछ दिनों पहले तक 1 लाख रुपये प्रतिमाह सैलरी लेने वाली स्वप्ना भी इन दिनों बेरोज़गार हैं. सेविंग इतनी है नहीं, इसलिए घर का ख़र्चा चलाने के लिए स्वप्ना भी मनरेगा के तहत मज़दूरी करने को मजबूर है.  

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एनडीटीवी से बातचीत में स्वप्ना कहती हैं कि 'मुझे मनरेगा के तहत मज़दूरी करने की कोई ज़रूरत नहीं थी, लेकिन कब तक सेविंग के भरोसे जीवन चल सकता है? आज भविष्य अनिश्चित स्थिति में है ऐसे में मुझे अपनी सेविंग आपातस्थिति के लिए बचा कर रखनी होगी. मेरे ससुराल वाले भी काम पर जा रहे हैं, तो मैं भी उनके साथ जा रही हूं. इससे मुझे कुछ अतिरिक्त आय मिल जाती है.  

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मैं ये मानती हूं कि किसी भी काम को करने में कोई शर्म नहीं होनी चाहिए. मैं एक सॉफ़्टवेयर इंजीनियर हूं इसलिए मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए? इस बारे में सोचने का कोई फ़ायदा नहीं है. जीवित रहने के लिए हमें हर तरह के काम करने होंगे.