कोरोना वायरस पूरी दुनिया में तेज़ी से फ़ैल चुका है. हज़ारों लोगों को इसने अपनी चपेट में ले लिया. कोई भी देश इस वायरस से पूरी तरह सुरक्षित नहीं है. ऐसे में लोग काफ़ी डरे हुए हैं. इसके ख़तरे को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी कोरोना वायरस को महामारी घोषित कर दिया. एक तरफ़ लोग इस वायरस से बचने की कोशिश में लगे हैं वहीं, दूसरी तरफ़ मेडिकल एक्सपर्ट दिन-रात लोगों की जान बचाने की जंग लड़ रहे हैं. एक ऐसी जंग जिसने उन्हें बुरी तरह थका दिया है. लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी है. लोगों की ज़िंदगी बचाने की लड़ाई जारी है. वायरस को मात देने का हौसला बुलंद है. इसी हौसले की गवाह सोशल मीडिया पर वायरल हो रही एक नर्स की तस्वीर बनी है. 

इटली की एक नर्स Alessia Bonari ने बताया कि जो लोग कोरोना वायरस से पीड़ित लोगों की जान बचाने में जुटे हैं, उन्हें किस तरीके की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. एलेसिया ने अपनी तस्वीर के साथ एक पोस्ट शेयर किया. तस्वीर में नर्स के चेहरे पर लाल-लाल धब्बे दिखाई पड़ रहे हैं. 

पोस्ट में लिखा, ‘मैं एक नर्स हूं और अभी एक मेडिकल इमेरजेंसी का सामना कर रही हूं. मैं डरी हुई हूं, शॉपिंग पर जाने से नहीं बल्कि मुझे काम पर जाने से डर लग रहा है.’ 

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Sono i un’infermiera e in questo momento mi trovo ad affrontare questa emergenza sanitaria. Ho paura anche io, ma non di andare a fare la spesa, ho paura di andare a lavoro. Ho paura perché la mascherina potrebbe non aderire bene al viso, o potrei essermi toccata accidentalmente con i guanti sporchi, o magari le lenti non mi coprono nel tutto gli occhi e qualcosa potrebbe essere passato. Sono stanca fisicamente perché i dispositivi di protezione fanno male, il camice fa sudare e una volta vestita non posso più andare in bagno o bere per sei ore. Sono stanca psicologicamente, e come me lo sono tutti i miei colleghi che da settimane si trovano nella mia stessa condizione, ma questo non ci impedirà di svolgere il nostro lavoro come abbiamo sempre fatto. Continuerò a curare e prendermi cura dei miei pazienti, perché sono fiera e innamorata del mio lavoro. Quello che chiedo a chiunque stia leggendo questo post è di non vanificare lo sforzo che stiamo facendo, di essere altruisti, di stare in casa e così proteggere chi è più fragile. Noi giovani non siamo immuni al coronavirus, anche noi ci possiamo ammalare, o peggio ancora possiamo far ammalare. Non mi posso permettere il lusso di tornarmene a casa mia in quarantena, devo andare a lavoro e fare la mia parte. Voi fate la vostra, ve lo chiedo per favore.

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उन्होंने अपने डर की सबसे बड़ी वजह बताते हुए कहा कि, ‘मैं इसलिए डरी हुई हूं क्योंकि मास्क चेहरे को पूरी तरह से कवर नहीं करता या फिर फिर मैंने खुद को गंदे ग्लव्स से छू लिया या लेंस मेरी आंखों को पूरी तरह से कवर न करते हों. मैं शारीरिक रूप से थकी हुई हूं क्योंकि यहां के प्रोटेक्टिव डिवाइसेज ठीक नहीं हैं. लैब कोट में हमें गर्मी लगती है और एक बार इसे पहन लेने के बाद मैं 6 घंटों तक न तो बाथरूम जा सकती हूं और न ही पानी पी सकती हूं. इन सब परेशानियों के बावजूद हम अपने काम पर जाएंगे।‘ 

एलेसिया ने आगे लिखा कि, ‘ मैं मनोवैज्ञानिक तौर पर पूरी तरह थक चुकी हूं. मेरी ही तरह मेरे बाकी साथी भी जो हफ्तों से ये काम कर रहे हैं. लेकिन इन सबके बावजूद हम हमेशा की तरह अपना काम करेंगे. मैं अपने मरीज़ों की देखभाल करूंगी क्योंकि मुझे अपनी जॉब से प्यार है. मैं इस परेशानी के वक़्त में घर में बंद नहीं रह सकती. मुझे काम पर जाना होता है और अपना काम करना पड़ता है. आप भी इसी तरह से अपना काम कीजिए.’ 

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एलेसिया की इस पोस्ट को लोगों ने काफ़ी पसंद किया है. लोगों ने उनका और अन्य मेडिकल प्रोफ़ेशनल्स का शुक्रिया अदा किया. 

बता दें, इटली कोरोना वायरस से सबसे ज़्यादा प्रभावित होने वाले देशों में से एक है. यहां अब तक 1800 से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. हालात किस कदर ख़राब हो चुके हैं, उसका अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बीते रविवार को महज़ 24 घंटे में कोरोना से 368 लोगों की मौत हो गई. ये पूरी दुनिया में एक दिन में अब तक मरने वालों का सबसे बड़ा आंकड़ा है.