जलियांवाला बाग़ हत्याकांड को बीते 100 साल से ज़्यादा हो गए हैं. मग़र आज भी ये पता नहीं लगाया जा सका है कि 13 अप्रैल 1919 को पंजाब के अमृतसर में हुए इस भयंकर नरसंहार में कितने लोग मारे गए थे. हाल ही में, जिला प्रशासन ने जलियांवाला बाग में शहीद हुए 492 लोगों की लिस्ट को अपनी वेबसाइट पर अपलोड किया है, मग़र ये लिस्ट भी अधूरी है. 

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प्रशासन ने शहीदों के परिजनों को अपने पूर्वजों का पता लगाने के लिए दस्तावेज़ जमा करने के लिए कहा गया है. अब तक 11 लोगों ने प्रासंगिक दस्तावेज जमा किए हैं और शहीदों के वंशज होने का दावा किया है. 

बता दें, कोरोना के चलते जलियांवाला बाग़ के शताब्दी समारोह का कोई भी कार्यक्रम नहीं हो सका था. ऐसे में अब जिला प्रशासन ने 25 जनवरी को अमृतसर के आनंद पार्क में शहीदों की याद में एक स्मारक के अनावरण और राज्य स्तरीय समारोह करवाने का फ़ैसला लिया है.

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ऐसे में प्रशासन ने जनता से अपील की है कि अगर उनके पास शहीदों के परिजनों की या अन्य कोई जानकारी है तो वो उसे 22 जनवरी तक डिप्टी कमिश्नर कार्यालय में उपलब्ध करवाएं. 

डीसी गुरप्रीत सिंह खैरा ने कहा कि सूची की प्रामाणिकता का पता लगाने के प्रयास किए जा रहे हैं. ‘हम शहीदों के परिजनों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं. जारी की गई लिस्ट में कई नामों के आगे उनके पिता का नाम या घर का पता अधूरा है.’

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दरअसल, उस वक़्त अंग्रेज़ों ने मृतकों और घायलों की जो लिस्ट जारी की थी, उसमें कई ग़लतियां थीं. डीसी के कार्यालय में 501 ऐसे व्यक्तियों की लिस्ट है, जिनमें से कई को 'अज्ञात' के रूप में चिह्नित किया गया है. 

गौरतलब है कि, जलियांवाला बाग़ में शांतिपूर्वक विरोध प्रदर्शन कर रहे भारतीयों पर 1,650 राउंड फायरिंग की गई थी. आज भी यहां दीवारों पर बने गोलियों के निशान उस वक़्त हुए नरसंहार के गवाह हैं. अंग्रेज़ों के मुताबिक, यहां 200 से 300 लोगों की मौत हुई थी, लेकिन भारतीयों के मुताबिक, ये आंकड़ा इससे कहीं अधिक था.