मध्य प्रदेश में पिछले 17 दिनों से जारी सियासी संकट के बीच सीएम कमलनाथ ने फ़्लोर टेस्ट से पहले इस्तीफ़े का ऐलान किया है. कमलनाथ शाम तक राज्यपाल से मिलकर उन्हें अपना इस्तीफ़ा सौंपेंगे.

कमलनाथ ने भोपाल में एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस कर बीजेपी पर निशाना साधाते हुए कहा प्रदेश की जनता ने मुझे 5 साल सरकार चलाने के लिए बहुमत दिया था, लेकिन बीजेपी को ये रास नहीं आ रहा था. बीजेपी ने प्रदेश की जनता के साथ धोखा किया है जनता उन्हें माफ़ नहीं करेगी.

इस दौरान कमलनाथ ने बीजेपी पर आरोप लगाते हुए कहा जब हमारी सरकार बनी थी हर 15 दिन में भाजपा नेता कहते थे कि ये सरकार 15 दिन या महीने भर की है. बीजेपी को 15 साल मिले थे, लेकिन मुझे सिर्फ़ 15 महीने में भी चैन से काम नहीं रहने दिया.

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प्रदेश की सड़कों पर घूम रही हमारी गो-माता के संरक्षण के लिए हमने 1000 गौशाला बनाने का फैसला किया, लेकिन बीजेपी को ये रास नहीं आया. हमारी सरकार की बदौलत 100 यूनिट फ़्री बिजली का फायदा प्रदेश के 1 करोड़ लोगों को हुआ, लेकिन बीजेपी को ये भी रास नहीं आया. कन्या विवाह में 28000 से बढ़कर 51000 रुपए की मदद की, बीजेपी को ये भी रास नहीं आया.

कांग्रेस के सभी 22 बागियों के इस्तीफ़े स्वीकार होने के बाद संख्या बल में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बन गई है. बीजेपी के पास 107 विधायक हैं. वहीं, कांग्रेस के पास स्पीकर समेत केवल 92 विधायक रह गए हैं. हालांकि, कांग्रेस के पास निर्दलीय और बसपा-सपा के 7 विधायकों का भी समर्थन है.

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ऐसे में अगर फ्लोर टेस्ट होता है तो कमलनाथ के लिए सरकार बचाना मुश्किल होगा. सरकार गिरी तो राज्यपाल बीजेपी को मौका दे सकते हैं.

कांग्रेस के 22 विधायकों के इस्तीफ़े स्वीकार होने के बाद विधानसभा की स्थिति कैसी होगी आइये देखते हैं?

मध्य प्रदेश की कुल 230 सीटों में से 2 विधायकों के निधन के बाद कुल सीटें 228 हैं. कांग्रेस के 22 विधायकों के इस्तीफ़े के बाद 206 रह जाएंगी. इस स्थिति में बहुमत के लिए ज़रूरी सीटें 104 चाहिए होंगी. बीजेपी के पास सर्वाधिक 107 सीटें हैं यानि कि बहुमत से 3 अधिक. जबकि कांग्रेस+ के पास केवल 99 यानि कि बहुमत से 5 कम.