मुंबई मशहूर 'कराची बेकरी' हमेशा के लिए हो बंद गई है. 67 साल पुरानी इस बेकरी के नाम में पाकिस्तानी के कराची शहर का नाम होने के चलते इसे कई बार का विरोध का सामना भी करना पड़ा. अब 'महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना' MNS 'कराची बेकरी' के बंद होने का क्रेडिट ख़ुद ले रही है, लेकिन इसके बंद होने की वजह कुछ और है. 

टाइम्स ऑफ़ इंडिया से बातचीत में बेकरी के मैनेजर रामेश्वर वाघमारे ने बताया, 'हमने पुराने लीज़ एग्रीमेंट के ख़त्म होने के बाद दुकान बंद कर दी. लॉकडाउन ने भी बिज़नेस पर काफी प्रभाव डाला था. नाम बदलने के लिए कोई कारण नहीं था. बेकरी सभी वेलिड लाइसेंस और एग्रीमेंट के साथ एक वेलिड बिज़नेस कर रही थी. हमारा ये फ़ैसला व्यावसायिक कारणों पर आधारित है. अगर कोई दूसरा इसका क्रेडिट लेना चाहता है, तो लेने दीजिए'. 

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बता दें कि 'महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना' (MNS) के नेता हाजी सैफ़ शेख़ ने पिछले साल नवंबर में 'कराची बेकरी' के मालिक को क़ानूनी नोटिस भेजा था, जिसमें दुकान के नाम से 'कराची' शब्द हटाने के लिए कहा गया था. अब MNS दुकान के बंद होने का श्रेय ले ले रही है. 

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बीते बुधवार को MNS के उपाध्यक्ष हाजी सैफ़ शेख़ ने ट्वीट करते हुए लिखा, 'अपने नाम के कारण बड़े पैमाने पर विरोध झेलने के बाद 'कराची बेकरी' को आख़िरकार मुंबई में अपनी एकमात्र दुकान को बंद करना ही पड़ा'.

हाजी सैफ़ शेख़ ने कहा, 'मैंने 'कराची बेकरी' को कारोबार बंद करने के लिए नहीं कहा था. पाकिस्तान की करतूत के चलते सीमा पर हर दिन हमारे जवान मारे जा रहे हैं. इसलिए मैंने उन्हें नाम बदलने के लिए 15 दिन का अल्टीमेटम दिया था. जब मैंने बेकरी के मालिक से कहा कि इसे इसका नाम बदलकर Karachee कर दें तो कहना था कि नाम उनके पैतृक शहर के लिए उनके पुराने संबंधों को दर्शाता है. 

अब यहां पर कोई नई शॉप खुल गई है  

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बता दें कि देश भर में कई ब्रांच वाले ऐतिहासिक बेकरी का मालिकाना हक सिंधी हिंदू रामनानी परिवार के पास है, जो विभाजन के बाद भारत चले आए थे. 'कराची बेकरी' पाकिस्तान के कराची के एक सिंधी हिंदू प्रवासी परिवार रामनियों द्वारा संचालित हैदराबाद स्थित श्रृंखला का हिस्सा है.