न जाने किस मोड़ पे अलविदा होगी

मैं जी लेता हूं ज़िंदगी अदा होगी’

एक उम्र का मिज़ाज ही कुछ ऐसा होता है. वो गाना है न, ‘हर फ़िक्र को धुएं में उड़ाता चला गया...’ हां, तो बस बेधड़क, बेपरवाह चलते रहते हैं. मगर जिस फ़िक्र को हम धुएं में उड़ाते हैं, वो ही धुआं बहुत जल्द ख़ुद एक फ़िक्र में तब्दील हो जाता है.

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केरल के रहने वाले 75 साल के वेणुगोपालन नायर के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ. अपनी ज़िंदगी के क़रीब 54 साल उन्होंने सिगरेट के धुंए में उड़ा दिए. इस दौरान उऩ्होंने अपनी सेहत और पैसा दोनों ही बरबाद किए. बस फ़क्र इतना रहा कि समय रहते उन्हें इस बात का एहसास हो गया. उन्होंने सिगरेट से तौबा कर ली. दिलचस्प ये रहा कि सिगरेट छोड़ने के क़रीब 8 साल बाद नायर ने 5 लाख रुपये की बचत की है, जो वो कभी सिगरेट पर ख़र्च कर देते.

दरअसल, केरल के कोझीकोड के रहने वाले नायर को बहुत कम उम्र से सिगरेट पीने की लत लग गई थी. उन्होंने बताया कि वो जब महज़ 13 साल के थे, तब ही से धूम्रपान करने लगे. शुरुआत बीड़ी से हुई. 67 की उम्र तक धूम्रपान की लत चरम पर पहुंच गई, लेकिन फिर उनके सीने में दर्द शुरू हो गया, जिसकी वजह से उन्होंने सिगरेट छोड़ने का फ़ैसला कर लिया.

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जिस दिन उन्होंने धूम्रपान करना बंद किया, उस दिन सिगरेट के एक पैकेट की बाज़ार में कीमत 50 रुपये थी. एक चेन स्मोकर दिन में एक से दो पैकेट पी लेता है, जिसकी गिनती एक दिन में 20 स्टोक्स होती है.

अपने नशे की लत को छोड़ने के बाद जमा हुए एक्सट्रा पैसों और बैंक में रखी पूंजी से अब नायर अपने मक़ान की दूसरी मंज़िल बनाना चाहते हैं. साथ ही पूर्व निर्माण क्षेत्र के कर्मचारी ने अपनी पत्नी और दो बच्चों का भविष्य सुरक्षित करने के लिए अपनी बचत को जारी रखने का मन बना लिया है.

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नायर वाकई में नशे की लत के शिक़ार लोगों के लिए एक बेहतरीन उदाहरण हैं. सालों तक अपनी मेहनत की कमाई को धुंए में बर्बाद करने के बाद अब नायर वापस कभी इस ख़राब आदत की ओर लौटना नहीं चाहते हैं.